वर्ष 1989 में लोकसभा चुनाव के दौरान बाहरी दिल्ली जनता दल उम्मीदवार चौ. तारीफ सिंह प्रचार करने के लिए कराला गांव पहुंचे। इस दौरान उनका वजन 81 किलोग्राम था और उम्र 45 वर्ष थी। लिहाजा, कराला गांव के चार ग्रामीणों ने चंदे के तौर पर वजन के अनुसार 8100-8100 रुपये दिए। इसके अलावा कराला गांव के समस्त निवासियों ने भी 8100 रुपये का चंदा दिया। इस दौरान गांव निवासी पूर्व पार्षद कामरेड ताराचंद ने कहा कि छोरे को रुपये की बहुत जरूरत है। इस कारण उनकी जितनी उम्र है उतने हजार रुपये चंदा दो। यह बात सुनकर चुनावी सभा में जोर का ठहाका लगा और ग्रामीणों ने उनकी बात को सहर्ष मानते हुए चुनावी सभा में ही साढ़े चार हजार रुपये एकत्रित करके दिए। इस तरह उन्हें कराला गांव में 45 हजार रुपये चंदे के रूप में मिले। इसके बाद चौ. तारीफ को कई गांवों में 45000-45000 रुपये चंदा मिला। इस चुनाव में चौ. तारीफ ने करीब 50 हजार मतों से जीत हासिल की थी।
(चौगामा विकास समिति के महासचिव विजेंद्र सिंह से बातचीत पर आधारित)
यादों में : पहले डोर-टू-डोर होता था चुनाव प्रचार
दिल्ली सरकार में मंत्री रहे डॉ. नरेंद्र नाथ ने सियासी पारी वर्ष 1970-71 से शुरू की थी। वे 1977 तक शाहदरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के महासचिव पद पर रहे। कांग्रेस में कई दूसरी जिम्मेदारियां भी दी गईं। इसमें 1983-1990 के दौरान मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के सदस्य और 1997-1998 तक एमसीडी में विपक्ष के नेता रहे।
वर्ष 1995-2004 के दौरान डीपीसीसी के उपाध्यक्ष रहे। वर्ष 1998 में दूसरी दिल्ली विधानसभा में विधायक चुने गए। इस दौरान शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, पर्यटन और भाषा मंत्री रहे। दिसंबर 2003 में तीसरी विधानसभा और 2008 में चौथी विधानसभा के लिए दोबारा विधायक चुने गए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ने चुनाव लड़ने के तरीके को काफी हद तक प्रभावित किया है। अब डोर-टू-डोर प्रचार कम हो गया है।
इससे मतदाता अपने उम्मीदवार को सही तरह से भाप नहीं पा रहे हैं। पहले ऐसे नहीं होता था, तब दिन-रात व किसी भी मौसम में चुनाव हो मतदाता के पास उम्मीदवार घर-घर जाते थे। बैठकें होती थीं। चुनाव जीतना अहम था, लेकिन उससे ज्यादा मतदाताओं की सेवा करना महत्वपूर्ण था। अब यह परिदृश्य बदल गया है।