भाजपा ने पहले चरण में सिर्फ उत्तर प्रदेश के ही प्रत्याशियों के टिकट नहीं काटे थे। सभी 47 सीटों पर पुराने प्रत्याशियों को ही रिपीट किया था। जबकि चार हारी हुई सीटों पर नए प्रत्याशी दिए थे। जबकि अन्य राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने कई वर्तमान सांसदों को टिकट नहीं दिया था। अब अनुमान यही लगाया जा रहा है कि उन्हीं राज्यों की तर्ज पर यूपी में बची हुई सीटों में से कइयों पर भाजपा कैंची चलाने वाली है। सूत्रों के मुताबिक चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कुछ राज्य सरकारों के मंत्रियों और विधायकों को भी सियासी मैदान में उतारा जा सकता है। दूसरे चरण की सीटों को घोषित करने से पहले बुधवार से होने वाली कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में ऐसे कई महत्वपूर्ण मंथन हो सकते हैं।
वहीं, भाजपा ने पहले चरण में 51 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। बची हुई 29 सीटों में से 5 सीटें भारतीय जनता पार्टी अपने गठबंधन के सहयोगी दलों को दे रही है। इसमें मिर्जापुर और सोनभद्र सीटें अपना दल के लिए हैं। जबकि घोसी की सीट पर सुभासपा को चुनाव लड़ना है। इसी तरह बिजनौर और बागपत लोकसभा सीट पर राष्ट्रीय लोकदल चुनाव लड़ेगी। जबकि बाकी अन्य सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को प्रत्याशी उतारने हैं। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड समेत अवध की सीटें शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी की चुनाव समिति की बुधवार को महत्वपूर्ण बैठक होनी है। जिसमें उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों की महत्वपूर्ण सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक कहा यही जा रहा है कि जिन राज्यों में अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशी नहीं घोषित किए हैं, वहां पर कई बड़े नेता और मंत्रियों की सीटें खतरे में पड़ी हैं।