यह भारत की सियासत है। राजनेता वार-पलटवार के लिए ऐसे-ऐसे शब्दों तक पहुंच जाते हैं, जिसके बारे में हम सोच भी नहीं पाते। शहजादे, शहंशाह, पनौती, जेबकतरा, पप्पू, छोटा पप्पू...। ऐसा ही एक नया शब्द कांग्रेस नेता राहुल गांधी खोजकर लाए हैं...खटाखट। उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल क्या किया, वह चर्चा में आ गया...कुछ इस कदर कि पीएम नरेंद्र मोदी भी इससे अछूते नहीं रहे। पीएम मोदी ने इस शब्द का इस्तेमाल किया भी तो राहुल पर हमले के लिए।
दरअसल, कुछ दिन पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल ने कहा था कि विपक्षी गठबंधन की सरकार बनी तो महिलाओं के खाते में हर महीने 8,500 रुपये खटाखट-खटाखट जाएगा और एक झटके में गरीबी से मुक्ति दिला देंगे। बृहस्पतिवार को पीएम मोदी ने प्रतापगढ़ में राहुल पर इसी शब्द के सहारे तीखा तंज कसा। पीएम ने राहुल व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा-शहजादों को न मेहनत की आदत है और न ही नतीजे लाने की, इसलिए कहते हैं, देश का विकास अपने आप होगा। देश का विकास खटाखट-खटाखट होगा।
पीएम ने कहा, ये सोचते हैं कि भारत आत्मनिर्भर अपने आप बन जाएगा और पूछो तो कहते हैं- खटाखट-खटाखट। ये कहते हैं कि भारत की गरीबी हम दूर कर देंगे-खटाखट। लेकिन अब इनको मालूम होना चाहिए कि रायबरेली की जनता भी खटाखट, खटाखट भेजेगी घर। अमेठी से गए और अब ये रायबरेली से भी जाएंगे। देश चलाना, सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए बच्चों का खेल नहीं है। 4 जून के बाद इंडी गठबंधन टूटकर बिखर जाएगा...खटाखट-खटाखट। बलि के बकरे को खोजा जाएगा...खटाखट-खटाखट। शहजादे चाहे लखनऊ वाले हों या दिल्ली वाले, गर्मी की छुट्टियों पर विदेश निकल जाएंगे खटाखट-खटाखट।