ओडिशा में पहली पंक्ति के भाजपा नेता केंद्रीय शिक्षा मंत्री और संबलपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि यह चुनाव राज्य में बदलाव का है। बीजद सरकार ने राज्य के लोगों के साथ धोखा किया है। भाजपा लोगों की नई चाह बन गई है। अनूप वाजपेयी ने राज्य की राजनीति, लोकसभा चुनाव के साथ हो रहे विधानसभा चुनावों से जुड़े तमाम सवाल किए। बातचीत के प्रमुख अंश।
खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे पार्टी ने ऐसी सीट से लड़ाया जो कभी हमारे पुराने क्षेत्र का हिस्सा रही है। यहां के लोगों ने नामांकन से लेकर प्रचार के दौरान जिस तरह का स्नेह दिया और बढ़-चढ़ का हिस्सा ले रहे हैं, उससे विश्वास बनता है कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले और नेतृत्व पर भरोसा है। इस चुनाव में न सिर्फ संबलपुर, बल्कि पूरे राज्य का मूड देखें तो लोगों की नई चाह है भाजपा। यह चुनाव बदलाव का है और भाजपा को लोगों का आर्शीवाद मिलने जा रहा है।
किस आधार पर राज्य में भाजपा की सीटें बढ़ने का दावा कर रहे हैं?
ओडिशा में भाजपा का ग्राफ बढ़ने के तीन कारण हैं। पहला-राज्य के लोगों की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विश्वसनीयता, दूसरा-हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की मजबूती, तीसरा-बीजू जनता दल की संवेदनहीन सरकार जो राज्य के लोगों को बार-बार धोखा दे रही है। भाजपा सभी 21 सीटों पर मजबूती से लड़ रही है। हमारी सीटों की संख्या दुगनी होगी। राज्य में सरकार भी हमारी बनेगी।
...लेकिन नवीन पटनायक की छवि तो लोकप्रिय मुख्यमंत्री की है।
राज्य को कोई संभालने वाला नहीं है। उड़िया समाज विकास में पिछड़ गया है। बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई गईं। न पीने का पानी है और न सिंचाई के लिए। राज्य में अस्पताल नहीं हैं। जहां हैं वहां डाक्टर नहीं रहते। स्कूलों की हालत ठीक नहीं है। आंकड़े देखें तो 50 फीसदी बच्चे हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। राज्य के युवाओं के लिए रोजगार नहीं है, इसलिए आबादी का एक तिहाई हिस्सा दूसरे राज्यों में पलायन कर जाता है। ऐसे तमाम मुद्दे अब राज्य की जनता खुद उठा रही है।
कभी भाजपा-बीजद के मुकाबले को दोस्ताना माना जाता था। इस बार तल्खी क्यों?
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तो पिछले चुनावों में भी रही है। हमारे अलग-अलग विचार हैं। भाजपा का दृष्टिकोण देश के विकास का है, जबकि बीजद दृष्टिहीनता की शिकार है। राज्य की भावनाओं के लिए कोई दृष्टि नहीं है। राजनीति में परिस्थिति का फायदा उठाते रहे हैं। अब राज्य के बीजद सरकार के 25 सालों के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं।
भाजपा खासकर आप जोर-शोर से उड़िया अस्मिता का सवाल उठा रहे हैं, ऐसा क्यों?
1936 में बना ओडिशा राज्य 2036 में 100 साल पूरे करने जा रहा है, लेकिन बुनियादी जरूरतों का हल अभी तक नहीं खोजा जा सका है। नई पीढ़ी को आने वाले साल अंधकारमय दिख रहे हैं। उनमें आक्रोश है। हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा करनी होगी। अब समय आ गया है हमें उड़िया सभ्यता, संस्कार और संस्कृति को बचाना होगा। उत्कृष्ट पहचान दिलानी होगी। ओडिशा की अस्मिता के लिए भाजपा की जीत जरूरी है।
भाजपा मुख्यमंत्री का चेहरा क्यों नहीं तय कर पाई?
इसकी कोई चिंता नहीं है। भाजपा के चेहरे के बिना मतदाता नवीन सरकार के खिलाफ वोट करेगा। मतदाताओं को पीएम मोदी के चेहरे पर भरोसा है। जब समय आएगा मुख्यमंत्री तय कर लेंगे।
बीजद और कांग्रेस में किसे सीधी टक्कर में मानते हैं?
संबलपुर के लोग भाजपा के साथ हैं और जिस तरह का समर्थन मिल रहा है उससे साफ है भाजपा बड़े अंतर से जीत दर्ज कराएगी। यहां लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहरे और उनकी योजनाओं पर पूरा भरोसा है।
भाजपा सत्ता विरोधी माहौल को मुद्दा बना रही है, केंद्र सरकार की उपलब्धियां क्यों नहीं गिना रही?
पानी का मुद्दा राज्य और केंद्र से भी जुड़ा है। केंद्र सरकार ने हर व्यक्ति को 10-10 हजार रुपये घर-घर पानी योजना के लिए दिए, लेकिन राज्य सरकार नहीं दे रही है। 10 वर्ष में केंद्र से विकास कार्यों के लिए 18 लाख करोड़ दिए गए, लेकिन उसमें भ्रष्टाचार किया गया। तमाम ऐसे मुददे हैं जो केंद्र से संबंधित हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।