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आम चुनाव: पत्नियां बनीं बाहुबलियों का सहारा तो दिग्गजों की राह में गठबंधन बना बाधा, कुछ नेताओं के कट गए टिकट

Sun, 31 Mar 2024 07:13 AM IST
जलज मिश्रा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली

सार

बाहुबली राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव टिकट की आस में आखिरी समय में कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी का भी विलय कर लिया, पर कभी उनके सियासी गुरु रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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पप्पू यादव, शहनवाज हुसैन। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस बार के आम चुनाव के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कई बाहुबलियों को टिकट पाने में पत्नियां सहारा बनीं, तो कई दिग्गजों की सीट गठबंधन की भेंट चढ़ गई। जिसने सीट गंवाई, अब वे नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। वहीं, पत्नियों के भरोसे बिहार के बाहुबलियों के लिए सियासत में संभावनाओं के द्वार नए सिरे से खुल गए हैं। जदयू और राजद ने चार बाहुबलियों की पत्नियों को टिकट का उपहार दिया है।

जदयू ने पूर्वांचल और कोसी में आतंक के पर्याय रहे आनंद मोहन की पत्नी लवली को शिवहर, कुख्यात अपराधी रहे रमेश सिंह कुशवाहा की पत्नी विजय लक्ष्मी देवी को सिवान सीट से उम्मीदवार बनाया है। वहीं, राजद ने बाहुबली अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती को पूर्णिया से व बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनिता कुमारी को मुंगेर से उम्मीदवार बनाया है। महतो ने तो टिकट पाने के लिए खरमास में ही शादी भी रचाई।

उधर, टिकट पाने में नाकाम रहे ज्यादातर नेताओं ने अतीत में पाला बदला है। दिलचस्प यह कि अब इन्हीं दलों में विभिन्न राज्यों में गठबंधन हो रहा है। पप्पू राजद में थे। फिर लालू के खिलाफ मोर्चा खोला। टिकट की उम्मीद में कांग्रेस में गए, मगर राजद ने सबक सिखाने के लिए सीट को प्रतिष्ठा से जोड़ लिया।

पूर्णिया की आस में राजद छोड़ कांग्रेस पहुंचे, मगर दरवाजे बंद

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बाहुबली राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव टिकट की आस में आखिरी समय में कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी का भी विलय कर लिया, पर कभी उनके सियासी गुरु रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पप्पू पूर्णिया से लड़ना चाहते थे, मगर लालू ने पूर्णिया के साथ पप्पू की विकल्प वाली मधेपुरा और सुपौल सीट भी कांग्रेस को देने से इन्कार कर दिया। इससे खफा पप्पू ने अकेले ही मैदान में उतरने का एलान कर दिया।

कन्हैया और शाहनवाज की उम्मीदों पर फिर गया पानी
बिहार में सीट बंटवारे के कारण भाकपा से कांग्रेस में गए कन्हैया कुमार और कभी भाजपा का मुस्लिम चेहरा रहे शाहनवाज हुसैन के लिए भी दरवाजे बंद हो गए। कन्हैया बेगूसराय से लड़ना चाहते थे, मगर वह सीट गठबंधन में भाकपा के खाते में चली गई है। वहीं, जदयू से नाता टूटने के बाद भागलपुर सीट पर शाहनवाज की दावेदारी पक्की मानी जा रही थी। इस बीच जदयू की एनडीए में वापसी हो गई, मगर यह सीट भाजपा के खाते में नहीं आई।

नसीमुद्दीन-सलमान भी लटके

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बसपा से कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी बिजनौर या मुरादाबाद से चुनाव लड़ना चाहते थे। कांग्रेस से गठबंधन में सपा ने यह दोनों सीटें अपने पास रखीं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ना चाहते थे, मगर समझौते में यह सीट सपा के खाते में चली गई।

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