झारखंड की 14 लोकसभा सीटों के लिए चार चरणों में हो रहे चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच है, लेकिन पांच अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीट पर कड़ी टक्कर मानी जा रही है। चौथे चरण में चार सीटों सिंहभूम, खूंटी, लोहरदगा, पलामू के लिए वोटिंग हो चुकी है। सांसद बनने की चाह में 12 से अधिक विधायक चुनाव मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। टिकट कटने से नाराज नेता भी अपनी पार्टी के खिलाफ ही ताल ठोंक रहे हैं। जो कल तक अपने थे, वे ही कहीं सामने तो कहीं पीछे से वार कर रहे हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार, अनुसूचित जनजाति के अधिकार, पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज यहां लगातार प्रचार और सभाओं में जुटे हुए हैं। शासन-प्रशासन के साथ सभी राजनीतिक दल अधिक से अधिक मतदान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
रांची: भाजपाई संजय सेठ के सामने अबकी कांग्रेसी सुबोधकांत की बेटी
रांची में इस बार मुकाबला दिलचस्प है। मुख्य मुकाबले में एक तरफ भाजपा के मौजूदा सांसद संजय सेठ हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने नए चेहरे यशस्विनी सहाय पर भरोसा जताया है। यशस्विनी सहाय रांची के पूर्व सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुबोध कांत सहाय की बेटी हैं। 2014 की मोदी लहर में भाजपा के रामटहल चौधरी जीते थे। 2019 के चुनाव में भाजपा के संजय सेठ ने जीत हासिल की। रांचीवासियों का कहना है कि शहर में तो भाजपा और मोदी के नाम का जोर है, पर गांव-देहात में गठबंधन की पैठ भी कमजोर नहीं है।
चतरा: भाजपा और गठबंधन में कड़ा मुकाबला
चतरा लोकसभा सीट पर पिछले दो चुनावों से भाजपा का कब्जा है। इसके पहले यहां राजद का दबदबा था। करीब नौ लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्र से है। अनुसूचित जाति 28.24 व अनुसूचित जनजाति 19.39 फीसदी हैं। पिछड़े और आदिवासियों की अधिक संख्या के बावजूद भाजपा और इंडिया गठबंधन ने अगड़ी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। भाजपा ने भूमिहार वर्ग के कालीचरण सिंह को टिकट दिया है, तो कांग्रेस (गठबंधन) से ब्राह्मण प्रत्याशी कृष्णानंद त्रिपाठी मैदान में हैं। मैदान में 22 उम्मीदवार हैं, लेकिन भाजपा और गठबंधन में ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। निर्दलीय और छोटे दल बड़े दलों का समीकरण बिगाड़ने का दम रखते हैं। भाजपा और गठबंधन के नेता इन्हीं के जोड़-घटाने में जूझ रहे हैं।
कोडरमा: कल्पना दे रहीं सांसद अन्नपूर्णा को टक्कर
यह लोकसभा क्षेत्र संसदीय चुनाव से कम, विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव से ज्यादा चर्चा में है। गांडेय विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की छोटी बहू कल्पना सोरेन मैदान में हैं। कल्पना की वजह से लोकसभा क्षेत्र भी गरमा गया है। गठबंधन मौजूदा सांसद अन्नपूर्णा को कल्पना के सहारे टक्कर देने की कोशिश कर रहा है। माले (गठबंधन) से विनोद सिंह मैदान में हैं।
18 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में बड़ी आबादी ओबीसी की है। यहां करीब पांच लाख कुशवाहा, पांच लाख ही यादव, ब्राह्मण-भूमिहार ढाई लाख के अलावा 50 हजार मुस्लिम वोटर भी हैं। भाजपा को राममंदिर और मोदी के दम पर जीत का भरोसा है तो गठबंधन को जातीय गणित के आधार पर जीत की आस है। निर्दलीय जयप्रकाश वर्मा कुशवाहा वोटों का गणित गड़बड़ाने वाले बताए जा रहे हैं।
हजारीबाग: जयंत सिन्हा फैक्टर अहम
2019 में भाजपा के जयंत सिन्हा ने 7,28,798 वोट लेकर बड़ी जीत हासिल की थी। कांग्रेस के गोपाल प्रसाद साहू 2,49,250 वोट ही पा सके। 2014 में भी भाजपा से जयंत सिन्हा ही जीते थे। भाजपा ने इस बार मनीष जायसवाल को उतारा है। यहां जयंत का टिकट कटने की बड़ी चर्चा है। कांग्रेस (गठबंधन) ने विधायक जयप्रकाश को टिकट दिया है। जयप्रकाश पहले भाजपा में थे। यशवंत सिन्हा भी जयप्रकाश के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि जयंत भी अंदरखाने नुकसान पहुंचाएंगे। इन हालात में भाजपा और कांग्रेस में ही कांटे का मुकाबला बताया जा रहा है।
गिरीडीह: जयराम महतो बने मुसीबत
गिरीडीह लोकसभा क्षेत्र में आदिवासी 15 फीसदी, दलित 11 फीसदी, अल्पसंख्यक 17 फीसदी के अलावा बड़ी आबादी पिछड़ी और महतो बिरादरी की है। आजसू (भाजपा गठबंधन) सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी मैदान में हैं। झामुमो (गठबंधन) ने विधायक मथुरा महतो को टिकट दिया है। निर्दलीय प्रत्याशी जयराम महतो की तलाश में पुलिस ने नामांकन के दौरान ही छापा मारा और गिरफ्तार कर लिया। जयराम ने संघर्ष समिति नाम का संगठन बनाकर पांच लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। जयराम को कुर्मी जाति का बड़ा नेता माना जाता है, इसलिए त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।
धनबाद : सरयू बनेंगे जीत-हार की वजह
यहां 2014 और 2019 में भाजपा के पशुपति नाथ सिंह ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने इस बार बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) ने अनुपमा सिंह को टिकट दिया है। अनुपमा विधायक कुमार जयमंगल सिंह की पत्नी हैं। खांटी नेता सरयू राय, ढुल्लू महतो का विरोध कर रहे हैं। पहले निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी भी दी थी। गठबंधन इससे फायदा उठाने का प्रयास कर रहा है। धनबाद सीट में 62 प्रतिशत शहरी और 38 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता हैं।
जमशेदपुर : निर्दलीय व छोटे दल बने चुनौती
जमशेदपुर में 60 फीसदी शहरी और 40 फीसदी ग्रामीण रिहाइश है। इस क्षेत्र में कुर्मी, आदिवासी, उड़िया, बंगाली और बिहारी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम, छत्तीसगढ़ी, कुशवाहा और यादव मतदाताओं का भी प्रभाव है। औद्योगिक नगरी मानी जाने वाले जमशेदपुर में झामुमो ने बहरा गोड़ा के विधायक समीर मोहंती को उतारा है। भाजपा ने विद्युत वरण महतो को टिकट दिया है। छह विधानसभा सीटों में से घाटशीला, बहरागोड़ा, कोटका, जुमगसलाई में झामुमो की बड़ी पैठ है।
दुमका: शिबू सोरेन की पार्टी और बहू में लड़ाई
दुमका में आठ बार के सांसद और पूर्व सीएम झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर है। बीमारी के चलते खुद मैदान में नहीं हैं। झामुमो (गठबंधन) की ओर से पूर्व विधायक नलिन सोरेन चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन को उतारा है। सोरेन परिवार में चल रहे भीतरी तनाव को हवा मिलने से यह सीट काफी चर्चा में है। पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया है। सांसद सुनील सोरेन का टिकट कटना भी मुद्दा है। सुनील पहले सीता के पति दुर्गा सोरेन के पीएस थे, इसलिए भी इस जंग को हवा दी जा रही है। हालांकि, सीता और भाजपा की पूरी टीम जीत को लेकर आश्वस्त है। झामुमो की ओर से प्रचार अभियान की कमान सीता सोरेन की देवरानी कल्पना सोरेन संभाल रही हैं।
गोड्डा: भाजपा मोदी-विकास तो गठबंधन जातीय गणित के भरोसे
गोड्डा में भाजपा से निशिकांत दुबे और कांग्रेस (गठबंधन) से प्रदीप यादव मैदान में हैं। हालांकि गठबंधन में दीपिका पांडेय सिंह का टिकट काटकर प्रदीप को देने का विरोध भी है। निशिकांत यहां जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। वहीं, झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के प्रदीप यादव 2019 में दूसरे नंबर पर थे। प्रदीप को उतारकर कांग्रेस ने एससी-एसटी गणित पर दांव लगाया है। भाजपा सांसद की विकास को लेकर तारीफ हो रही है, मगर उनके गढ़ देवघर में ही एक धड़ा विकास की वजह से उजड़ने के नाम पर विरोध भी कर रहा है। देवघर के बाहर गोड्डा और उससे लगे देहात क्षेत्र में प्रदीप यादव की सक्रियता और लोकप्रियता भाजपा को अखर रही है।
राजमहल: टिकट कटने बंटने से गरमाया माहौल
इस सीट पर झामुमो के विजय कुमार हंसदक लगातार दो बार से सांसद हैं। उन्होंने 2019 में मोदी लहर में भी भाजपा के हेमलाल मुर्मू को हराया था। झामुमो ने फिर हंसदक पर भरोसा जताया है, तो भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी को उतारा है। टक्कर कांटे की मानी जा रही है। हालांकि लिट्टीपाड़ा से झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम हंसदक की उम्मीदवारी के विरोध में बगावत पर उतर आए हैं। उन्होंने उम्मीदवार न बदलने पर निर्दलीय उतरने की चेतावनी दी है। इससे झामुमो को नुकसान हो सकता है।
चार सीटों पर हो चुका मतदान
- खूंटी: केंद्रीय मंत्री और पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा आैर कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) के कालीचरण मुंडा के बीच कड़ा मुकाबला है। पिछली बार मुंडा ने कालीचरण को 1445 मतों से हराया था। इस बार यहां 69.02% मतदान हुआ।
- लोहरदगाः भाजपा के समीर ओरांव और कांग्रेस के सुखदेव भगत में टक्कर है। इस बार यहां 64.86 फीसदी मतदान हुआ।
- सिंहभूम: पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा इस बार भाजपा से हैं। झामुमो से पूर्व मंत्री जोबा मांझी मैदान में हैं।
- पलामू: इस सुरक्षित सीट पर भाजपा ने झारखंड के पूर्व डीजी बीडी राम को मैदान में उतारा तो राजद (इंडिया गठबंधन) ने ममता भूइंया को उम्मीदवार बनाया। यहां 61.04 फीसदी मतदान हुआ।