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ग्राउंड रिपोर्ट: कोंकण की तराई में उद्धव और नारायण की अग्नि परीक्षा, दो कद्दावर नेताओं के बीच कांटे की टक्कर

सुरेंद्र मिश्र, सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी (महाराष्ट्र) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 May 2024 06:41 AM IST

सार

Ground report: महाराष्ट्र राजनीतिक रूप से देश का अहम राज्य है। 48 लोकसभा सीटों वाले इस प्रदेश में सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी में दो कद्दावर नेताओं के बीच कांटे की टक्कर होने के आसार हैं। 39 साल तक शिवसैनिक रहे केंद्रीय मंत्री राणे और शिवसेना (यूबीटी) के विनायक चुनावी रण में ताल ठोक रहे हैं। सियासी मुकाबले पर पढ़िए सुरेंद्र मिश्र की रिपोर्ट
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नारायण राणे और विनायक राउत - फोटो : एएनआई (फाइल)


शिवसेना के दोफाड़ होने के बाद कोंकण में पहली बार उद्धव जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि टक्कर 39 साल तक शिवसैनिक रहे केंद्रीय मंत्री नारायण राणे से है। उद्धव ने यहां से विनायक राउत को उतारा है जो हैट्रिक लगाने के लिए जोर लगा रहे हैं।  


कोंकण का इलाका खूबसूरत समुद्री तटों के अलावा हरे-भरे जंगल और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह विश्वप्रसिद्ध अलफांसो आम, काजू और जामुन के अलावा मजबूत किलों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां एनडीए में शामिल शिवसेना ही चुनाव लड़ती रही है। इसलिए भाजपा का मजबूत आधार नहीं बन पाया। 2009 में नारायण राणे के पुत्र नीलेश कांग्रेस से जीते थे। उसके बाद शिवसेना-भाजपा के साझा उम्मीदवार विनायक राउत ने नीलेश को दो बार हराकर भगवा लहराया। शिवसेना टूटने और भाजपा से नारायण राणे के उतरने से लड़ाई दिलचस्प हो गई है।


पिछले दो चुनावों का हाल

2019

उम्मीदवार            दल              मत%

विनायक राउत    शिवसेना        50.76

नीलेश राणे        एमएसएचपी    38.27


2014

विनायक राउत    शिवसेना         55.01

नीलेश राणे           कांग्रेस         38.27


समीकरण

यह लोकसभा सीट सिंधुदुर्ग की तीन कुडाल, कणकवली, सावंतवाड़ी और रत्नागिरी की तीन चिपलून, रत्नागिरी व राजापुर विधानसभाओं को मिलाकर बनी है। राजापुर व कुडाल को छोड़ चार में तीन पर शिवसेना (शिंदे गुट) और एक पर नितेश राणे भाजपा के विधायक हैं। सिंधुदुर्ग को राणे का गढ़ कहा जाता है, जबकि रत्नागिरी जिले में लोग उद्धव के समर्थन में हैं। रत्नागिरी में लोग बालासाहेब ठाकरे को मानते हैं। ऐसे में लड़ाई कांटे की है।

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