झारखंड के प्रवेश द्वार कोडरमा में देखते-देखते सियासी तपिश बढ़ गई। वजह रही झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के मुखिया शिबू सोरेन की छोटी बहू और पूर्व सीएम हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन का इसी लोकसभा क्षेत्र की गांडेय विधानसभा सीट से उपचुनाव में मैदान में उतरना। दरअसल, शिबू सोरेन को जेल गए हेमंत के विकल्प के लिए अगले उत्तराधिकारी की तलाश है और नेमरा गांव में सोरेन कुनबे के साथ पूरा झारखंड भी कल्पना को इसी चश्मे से देख रहा है। कल्पना घर-घर जाकर हेमंत की गिरफ्तारी और भाजपा की मनमानी के खिलाफ खुद के लिए और गठबंधन के लोकसभा उम्मीदवार विनोद सिंह के लिए वोट मांग रही हैं। वहीं, शिबू की बड़ी बहू सीता भाजपा की अन्नपूर्णा देवी के लिए पूरा जोर लगाए हैं।
तीर कमान वाली झामुमो के सर्वेसर्वा गुरुजी की कोशिश है कि जातीय गणित के साथ कल्पना को आगे करके एक तीर से कई निशाने लगाने की। यानी उपचुनाव के सहारे नए वारिस की तलाश, आदिवासियों को लुभाना और अन्नपूर्णा की टक्कर में कल्पना से प्रचार करवाकर महिलाओं का ध्यान खींचना। कल्पना विधानसभा के साथ ही लोकसभा में जीत हासिल करने के इरादे से आगे बढ़ रही है, जिसके चलते भाजपा यहां धुआंधार प्रचार में लगी हुई है।
फिलहाल पूरे कोडरमा में गठबंधन प्रत्याशी माले के विनोद सिंह से ज्यादा चर्चा कल्पना की है। मानो वही लोकसभा चुनाव भी लड़ रही हों। हजारीबाग से विभाजित हुए कोडरमा की पहचान झुमरी तलैया शहर और पर्यटन नगरी के तौर पर भी है। देवघर की ओर से कोडरमा जाएं या हजारीबाग से, प्रचार में भाजपा ही दमदार नजर आती है। गांडेय में शहर से लेकर गांव तक हिंदूवादी संगठनों या भगवा झंडे ही ज्यादा लहराते दिखाई देते हैं, मगर कल्पना की वजह से यहां गठबंधन भी मुकाबले में मजबूती से बना हुआ है।
आदिवासियों के दिलों में आज भी गुरुजी
झामुमो प्रखंड सचिव भैरो प्रसाद दावा करते हैं कि 20 मई को दोनों सीटों के लिए झामुमो और माले (गठबंधन) पर ही मुहर लगेगी। आदिवासी समाज के अलावा कुशवाहा, कुर्मी और मुस्लिम वोट भी विनोद सिंह को ही पड़ेंगे। बाबूजान और जब्बार अंसारी ने भी गठबंधन को ही आगे बताया। आदिवासी गांवों में प्रचार कर रहे इसी समाज के सनातन चौड़े का दावा है कि भले ही भाजपा उनके समाज में पैठ के कितने दावे कर ले, मगर आदिवासियों के दिलों में आज भी गुरुजी ही बसे हैं।
कभी लालू के नजदीकी नेताओं में रहीं...आज भाजपा प्रत्याशी
बिहार के पूर्व मंत्री रमेश यादव के देहांत के बाद उनकी पत्नी अन्नपूर्णा ने 1998 में राजनीति में प्रवेश किया। कोडरमा उपचुनाव में जीत हासिल करके वह पहली बार राजद की विधायक बनीं। संयुक्त बिहार में खान मंत्री बनीं। उसके बाद लगातार तीन विस चुनाव जीत के बाद उनकी गिनती लालू के नजदीकी नेताओं में होती थी।
2013 में वह हेमंत सरकार में जल संसाधन मंत्री बनाई गईं। 2014 में हार गईं। लालू ने उन्हें झारखंड में राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। हालांकि, मार्च-19 में अचानक राजद से नाता तोड़कर वह भाजपा में शामिल हो गईं। अन्नपूर्णा ने 2019 लोस चुनाव में बाबूलाल मरांडी को हराकर जीत हासिल की।
राम को लाए हैं...हरे झंडों से पटे गांडेय के बाजार को पार करके गलियों में जाते ही फिजा कुछ अलग दिखी। गठबंधन की जीत के दावे सुनकर खुद नजदीक आए सुनील राम बोले-चुनाव वाले दिन सब हवा हो जाएंगे। अब यहां भाजपा ही जीतती है। दूर खड़े मुस्कुरा रहे कैलाश राम ने भी समर्थन में गर्दन हिलाई। बोले-यहां राम, अयोध्या और मोदी के नाम पर भाजपा को ही वोट पड़ते हैं। हम राम को लाए हैं..भजन जैसे ही गूंजेगा, लोग सारे गिले-शिकवे और कष्ट भूलकर भाजपा को वोट डालेंगे।
पिछले दो लोकसभा चुनाव का परिणाम
| लोकसभा चुनाव 2019 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| अन्नपूर्णा देवी यादव |
भाजपा |
62.26 |
| बाबूलाल मरांडी |
झाविमो |
24.59 |
| लोकसभा चुनाव 2014 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| रवीन्द्र कुमार राय |
भाजपा |
35.65 |
| राजकुमार यादव |
सीपीआई एमएल |
26.03 |