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कहानी चुनाव की: पहला आम चुनाव तो 1951 में हुआ लेकिन लक्षद्वीप में 16 साल बाद हुआ मतदान, पढ़ें पूरी खबर

Tue, 19 Mar 2024 06:27 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की पहली लोकसभा 17 अप्रैल, 1952 को अस्तित्व में आई, 13 मई को पहली बैठक हुई। गणेश वासुदेव मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष बने। वे 15 मई 1952 से 27 फरवरी 1956 तक इस पद पर रहे। उन्हें दादा साहब मावलंकर के नाम से याद किया जाता है।
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लक्षद्वीप - फोटो : Social media
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विस्तार
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देश में पहला लोकसभा चुनाव 1951 में हुआ, पर क्या आप जानते हैं कि लक्षद्वीप में पहला लोकसभा चुनाव 1967 में हुआ था। लक्षद्वीप 1956 तक मलाबार निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा था। उस वर्ष एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बन गया। 1957 और 1962 के बीच लक्षद्वीप में एक नामांकित सदस्य ही हुआ करता था। वे थे के नल्ला कोया थांगल। वर्ष 2014 तक यह वोटरों की संख्या के हिसाब से देश का सबसे छोटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र था।

मावलंकर पहले लोकसभा अध्यक्ष

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देश की पहली लोकसभा 17 अप्रैल, 1952 को अस्तित्व में आई, 13 मई को पहली बैठक हुई। गणेश वासुदेव मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष बने। वे 15 मई 1952 से 27 फरवरी 1956 तक इस पद पर रहे। उन्हें दादा साहब मावलंकर के नाम से याद किया जाता है। पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें लोकसभा के जनक की उपाधि से सम्मानित किया था।

सुकुमार सेन पहले चुनाव आयुक्त
निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को हुई। सुकुमार सेन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उन्हीं की बदौलत पहला आम चुनाव हुआ, नागरिक पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए। उनकी ख्याति से प्रभावित सूडान ने भी उन्हें अपने यहां चुनाव करवाने बुलाया था। कहा जाता है, सेन की ही बदौलत दूसरे आम चुनाव में साढ़े चार करोड़ की बचत हो सकी। वे 1958 तक इस पद पर रहे। सेन को 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
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पहले मतदाता श्याम सरण नेगी
आजाद भारत में पहली बार आम चुनाव फरवरी, 1952 में हुए थे, पर भारी बर्फबारी की आशंका के कारण हिमाचल में पांच महीने पहले मतदान की व्यवस्था की गई थी। सर्दियों के मौसम में काल्पा में चार से पांच फुट तक बर्फ गिरती थी, तापमान माइनस 20 डिग्री तक चला जाता है। चीनी तहसील के नागरिकों ने सबसे पहले मतदान किया और देश के पहले वोटर बने श्याम सरण नेगी। नेगी ने 25 अक्तूबर, 1951 को मतदान किया। वर्ष 2022 में 106 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। लोकतंत्र में मताधिकार को लेकर वे इतने जागरूक थे कि हर चुनाव में मतदान किया। हालांकि अधिक उम्र के चलते आखिरी बार मतदान घर से ही किया था। 2014 में चुनाव आयोग ने उन्हें ब्रांड अंबेसडर बनाया था।

बूथ कैप्चरिंग की पहली घटना बिहार में
देश में बूथ कैप्चरिंग की पहली घटना दूसरे आम चुनाव में बिहार के बेगूसराय में हुई। इसके चलते मटिहानी विधानसभा सीट पर चुनाव रद्द करना पड़ा था। यह भूमिहार बेल्ट था। हालांकि, यह क्षेत्र कम्युनिस्ट पार्टी का भी गढ़ था, लेकिन यह विशेष चुनाव कांग्रेस ने जीता था। पांच साल बाद इस जिले से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के चंद्रशेखर सिंह ने जीत हासिल की। 1989 में बूथ कैप्चरिंग को औपचारिक रूप से परिभाषित किया गया और दंड तय किया गया।

वन नेशन-वन इलेक्शन
देश का पहला चुनाव वन नेशन-वन इलेक्शन था। एक ही मतदाता सूची के आधार पर लोकसभा के साथ विधानसभाओं के लिए भी मतदान हुआ। 68 चरणों में हुए चुनाव में 10.5 करोड़ लोगों ने मतदान किया।

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