गरीबी...पहले आम चुनाव से लेकर अब तक हो चुके 17 चुनावों में अलग-अलग रूप में मुद्दा बनता रहा है। वर्ष 1971 का चुनाव तो इंदिरा गांधी ने महज गरीबी हटाओ के नारे की बदौलत ही जीत लिया था। देश विकास की राह पर है, तरक्की की इबारत लिख रहा है, मगर इस तथ्य से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि गरीबी खत्म होने की रफ्तार बेहद धीमी रही है...इतनी कि आजादी के 77 साल बाद हो रहे चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
गरीब और गरीबी लोकसभा चुनाव-2024 में फिर से मुद्दा बना है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार हो, या कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन...या इन दोनों गठबंधनों से दूरी बनाने वाली तृणमूल जैसी पार्टियां...सबकी निगाहें इस वर्ग पर टिकी हैं। देश के सबसे बड़े वोट बैंक गरीबों को साधने के लिए सभी दल जतन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बीते 10 साल के कार्यकाल में इस वर्ग को मिलने वाली सहूलियतों को गिना रही है। खासकर नीति आयोग की उस रिपोर्ट को, जिसमें मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल में 25 करोड़ लोगों के गरीबी के दुष्चक्र से बाहर आने की बात कही गई है। वह यह भी गिना रही है कि 80 करोड़ गरीबों को सरकार की ओर से निशुल्क राशन दिया जा रहा है। पक्के घर दिए गए हैं, शौचालय बनवाए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष इसकी दूसरी और बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करता है। वह हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति और कमजोर होने का जिक्र करता है। कांग्रेस संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट का हवाला देकर कहती है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दस साल के कार्यकाल में 27 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले थे। तब 54 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिलता था। अब यह संख्या 80 करोड़ है। इसका मतलब है कि देश में गरीबी कम होने के बदले और बढ़ी है।
भाजपा की रणनीति
विपक्ष सवाल के साथ कर रहा वादे- सरकार ने 23 करोड़ लोगों को फिर गरीब बनाया
वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि यूपीए सरकार ने दस साल में 27 करोड़ लोगों को गरीबी से मुक्त कराया था। इस सरकार ने 23 करोड़ लोगों को वापस गरीब बना दिया। यह नोटबंदी, गलत जीएसटी और कोरोना काल में उचित सहारा न मिलने के कारण हुआ। एक तरफ 84 फीसदी लोगों की आमदनी घटी है, तो वहीं देश का 40 फीसदी धन महज दस लोगों के हाथों में है।
गरीब कौन...इस पर हमेशा उठे सवाल
गरीब वर्ग अब भी देश का सबसे बड़ा वोट बैंक है। साल 2011-12 में देश में 26.9 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे थे। वर्तमान में 22% आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।