बंगलूरू से करीब 93 किलोमीटर दूर स्थित मांड्या की सियासत पिछले डेढ़ दशक में कई रंग दिखा चुकी है। मांड्या से भाजपा सीधे तौर पर एक भी चुनाव नहीं जीती है। 1952 से लेकर 2004 तक यहां कांग्रेस का दबदबा रहा। 2009 से समीकरण बदले तो लगातार दो आम चुनावों में जेडीएस ने जीत दर्ज की।
2019 में कांग्रेस से गठबंधन कर जेडीएस ने यहां से पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी को मैदान में उतारा, जिन्हें निर्दलीय सुमालता अंबरीश ने करीब सवा लाख वोटों से हरा दिया था। भाजपा ने सुमालता के खिलाफ प्रत्याशी न उतारकर उन्हें समर्थन दिया था। इस बार समीकरण फिर बदले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी खुद मैदान में हैं। तब सुमालता को समर्थन देकर जेडीएस के विरोध में खड़ी भाजपा इस बार उनसे ही गलबहियां कर रही है। वर्तमान सांसद सुमालता भी भाजपा में हैं। लड़ाई में सामने है तो सिर्फ कांग्रेस, जिसने प्रदेश के सबसे अमीर प्रत्याशी वेंकटरमण गौड़ा उर्फ स्टार चंद्रू गौड़ा को मैदान में उतारा है। पेशे से ठेकेदार चंद्रू ने चुनावी हलफनामे में 267.05 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्शायी है। उनकी पत्नी कुसुमा के पास 329.32 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है।
स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई
हासन के रहने वाले एचडी कुमारस्वामी के लिए न मांड्या नया क्षेत्र है और न ही मांड्या के लिए वह। लेकिन, कांग्रेस यहां पूरी लड़ाई को स्थानीय बनाम बाहरी का रंग देने की कोशिश में है। साथ ही, प्रदेश सरकार की गारंटियों के सहारे मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में है। पिछले साल के विधानसभा चुनाव में आठ में से सात सीटों पर कब्जा जमाने वाली कांग्रेस इस बार भी माहौल को अपने पक्ष में मान रही है।