सियासत में बाजी जीतने के लिए वादे और दावे दलों के अब तक के मुख्य हथियार रहे हैं। पर, इस बार स्थिति बदली-सी है। वादे और दावे की जगह भरोसे और गारंटी ने ले ली है। इसमें भी, सबसे अधिक चर्चा मोदी की गारंटी और कांग्रेस की न्याय गारंटी की है। लड़ाई चेहराविहीन विपक्षी गठबंधन और ब्रांड मोदी के बीच है।
भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए और कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष ने भरोसा व गारंटी देने के लिए इस बार चुनावी तारीखों की घोषणा तक का इंतजार नहीं किया। एनडीए की ओर से खुद पीएम नरेंद्र मोदी मतदाताओं को 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने, तीसरे कार्यकाल में दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने जैसी कई तरह की गारंटी दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस युवाओं को सरकारी भर्ती के भरोसे के साथ नौकरी की गारंटी, महिला, गरीब और किसान वर्ग को अलग-अलग तरह की न्याय गारंटी दे रही है।
इन मुद्दों पर जंग
मोदी की गारंटी: पीएम मोदी विकसित राष्ट्र, तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था, वंचितों का सशक्तीकरण, किसानों के कल्याण और युवाओं के विकास की गारंटी दे रहे हैं। खुद पीएम जनसभाओं में मोदी की गारंटी और भरोसे की चर्चा कर रहे हैं।
कांग्रेस की न्याय गारंटी: न्याय गारंटी के हथियार से तेलंगाना, हिमाचल और कर्नाटक में जीती कांग्रेस, इसे राष्ट्रीय स्तर पर भुनाना चाहती है। दो देशव्यापी न्याय यात्रा से चार प्रमुख वर्गों किसान, युवा, महिला और गरीब को उनकी समस्याएं खत्म करने की गारंटी दे रहे हैं।
बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि
विपक्ष: बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि के मुद्दों को केंद्र में लाकर युवाओं और आम लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है।
एनडीए: मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाने के साथ विभिन्न वर्गों के सशक्तीकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने का हवाला दे रहा है।
हिंदुत्व-राष्ट्रवाद के मुद्दे
भाजपा की झोली हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मामले में उपलब्धियों से भरी हुई है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 का खात्मा, सीएए लागू करना, उत्तराखंड से समान नागरिक संहिता की शुरुआत, तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने जैसी उपलब्धियां हैं, जिस पर भाजपा आक्रामक तरीके से विपक्ष को घेर रही है।
अमृत काल
भाजपा अपनी सरकार की दस साल की उपलब्धियां गिनाकर चुनावी मुद्दे को अमृतकाल बनाम अन्य काल के रूप में बदलने की कोशिश कर रही है। संसद में पेश श्वेत पत्र इसी रणनीति का हिस्सा थी।
चुनावी बॉन्ड
चुनावी बॉन्ड की सूचनाएं सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में जुटा है। विपक्ष का सरकार पर उद्योगपतियों- कारोबारियों को धमकाकर चंदा लेने का आरोप है।
बॉन्ड खरीद में विवादास्पद कंपनियां किन पर मेहरबान रहीं, यह रहस्य खुलेगा तो मुद्दे की आग और फैलेगी।
किसान
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कृषि क्षेत्र चर्चा में रहा। सरकार को कृषि बिल वापस लेने पड़े। अब एमएसपी की कानूनी गारंटी पर सरकार व विपक्ष के बीच रस्साकशी जारी है। सरकार का दावा है कि किसान हित में इतने फैसले लिए, जितने पहले कभी नहीं हुए।