यूपी में भाजपा 16 सीटों पर दूसरे स्थान पर थी। इनमें कांग्रेस ने एक, बसपा ने दस और सपा ने पांच सीटें जीती थीं। बाद में आजमगढ़ और रामपुर में हुए उपचुनाव में पार्टी ने बाजी मार ली थी। इस बार पार्टी इन 16 सीटों को हासिल करने पर जोर लगा रही है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीत की हैट्रिक के साथ बड़े विस्तार का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के लिए चार सौ पार, तो अपनी पार्टी के लिए 370 सीटें जीतने का नारा दिया है। हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भाजपा को हिंदी पट्टी में पुराना प्रदर्शन बरकरार रखते हुए कांग्रेस ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दलों के दबदबे में सेंध लगाने के साथ दक्षिण भारत के तिलिस्म को तोड़ना होगा।
विस्तार के लिए भाजपा की निगाहें उन 133 सीटों पर है, जहां बीते चुनाव में पार्टी जीत हासिल करने में नाकाम रही थी। इनमें भी खास जोर उन 72 और 31 सीटों पर है, जहां पार्टी दूसरे और तीसरे स्थान पर रही थी। पार्टी ने इन सीटों के लिए खास रणनीति बनाई है। हालांकि तथ्य यह है कि इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी को क्षेत्रीय दलों की दीवार लांघनी होगी।
विस्तार के लिए भाजपा की निगाहें पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर हैं, जहां पार्टी ने बीते चुनाव में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया था। बंगाल में भाजपा की सीटों की संख्या दो से 18, तो ओडिशा में एक से आठ पहुंच गई थी। दूसरे स्थान वाली 33 सीटें भी इन्हीं दो राज्यों से है। पार्टी ने बीते पांच साल में यहां संगठन को मजबूत करने, मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं के लगातार दौरे के जरिये अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है।
दूसरे स्थान का गणित
31 सीटें ऐसी जहां तीसरे स्थान पर रही भाजपा, इनमें 23 सीटें केरल व तेलंगाना की।
पांचवें, छठे और सातवें स्थान वाली 23 सीटें...20 सीटें अकेले आंध्रप्रदेश की।
यूपी से बड़ी उम्मीद
दक्षिण में भी टीडीपी-जनसेना से गठबंधन
पार्टी ने आंध्रप्रदेश में मुख्य विपक्षी दल टीडीपी और जनसेना से गठबंधन किया है। पार्टी ने केरल में पांच, तमिलनाडु में चार सीटें चिह्नित की हंै, जहां बीते चुनाव में उसे एक लाख से तीन लाख तक वोट मिले थे। पार्टी की तेलंगाना की उन नौ सीटों पर भी निगाह है, जहां बीते चुनाव में पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी।
कहां विस्तार और कहां हुआ घाटा
स्ट्राइक रेट के साथ मत प्रतिशत में बढ़ोतरी
बीते चुनाव में भाजपा 2014 के मुकाबले आठ सीटें ज्यादा 436 सीटों पर लड़ी और उसे 21 सीटों का लाभ हुआ। इस दौरान पार्टी के मतप्रतिशत में 6.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पार्टी की रणनीति मत प्रतिशत में और बढ़ोतरी कर विस्तार की संभावना को बढ़ाने की है।