अमरावती विदर्भ का दूसरा बड़ा संभाग है। लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं, जिसमें अमरावती, बडनेरा, दर्यापुर, अचलपुर, तिवसा और मेलघाट शामिल हैं। बडनेरा से नवनीत राणा के पति रवि राणा निर्दलीय विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के तीन सुलभा संजय खोडके, तिवसा से यशोमती ठाकुर और दर्यापुर से बलवंत बसवंत वानखड़े विधायक हैं। मेलघाट व अचलपुर में प्रहार संगठन के राजकुमार पटेल और बच्चू कड़ू विधायक हैं। यहां भाजपा का कोई विधायक नहीं है। यहां शहर की तुलना में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या दोगुनी है। दलित-आदिवासी, कुनबी, सिंधी और मुस्लिम के अलावा तीन लाख से अधिक हिंदीभाषी मतदाता हैं, जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। दिनेश बूब लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं।
धनशक्ति बनाम जनशक्ति की लड़ाई है : वानखड़े
कांग्रेस उम्मीदवार बलवंत वानखड़े कहते हैं, लड़ाई धनशक्ति बनाम जनशक्ति की है। नवनीत राणा के मैदान में आने से लड़ाई और आसान हो गई है। वानखडे डीएमके (दलित, मुस्लिम और कुनबी) के साथ हिंदीभाषियों को साधने में जुटे हैं। बलवंत वानखेड़े का अब तक का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत से विधायक तक का रहा है। ग्राम पंचायत सदस्य चुने जाने के बाद सरपंच बने। उसके बाद वह जिला परिषद सदस्य और अध्यक्ष भी रहे। वह रोजगार, कपास के भाव और आदिवासियों के मुद्दे पर नवनीत राणा को घेर रहे हैं।
नागपुर की तर्ज पर करना है विकास : नवनीत
भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा कहती हैं कि वह अमरावती का विकास नागपुर की तर्ज पर करना चाहती हैं। स्वयं को मेलघाट (कुपोषण के लिए कुख्यात आदिवासी इलाका) की बेटी कहती हैं। नवनीत के पति रवि राणा का युवा स्वाभिमान संगठन है, जिसके माध्यम से उनका क्षेत्र में मजबूत जनसंपर्क है। जबकि नवनीत कट्टर हिंदुत्व के रुख के साथ चुनाव प्रचार कर रही हंै। वह क्षेत्र में लोकप्रिय हैं, लेकिन उनके दुश्मनों की भी कमी नहीं है। राणा परिवार का विरोधी दल के नेताओं से छत्तीस का आंकड़ा है। वहीं, भाजपा की अंदरुनी नाराजगी से निपटने की भी चुनौती है।