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Gujarat: रूपाला की वजह से आणंद में फंसी BJP, क्षत्रियों की नाराजगी में हाथ से गया 'राम मंदिर'; मोदी से उम्मीद

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 02 May 2024 08:21 PM IST

सार

बुधवार रात को आणंद में क्षत्रियों ने विशाल रैली आयोजित की। उसमें समाज को मैसेज दे दिया गया कि ईडी-सीबीआई से डरना नहीं है। समाज के प्रमुख नेता पीटी जडेजा ने कहा, भाजपा को वोट नहीं देना है। गुरुवार सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी आणंद पहुंचे। उन्होंने भी एक विशाल रैली को संबोधित किया। क्षत्रिय समाज की रैली में शहर के अलावा आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोगों ने शिकरत की।
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ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : Amar Ujala


बुधवार रात को आणंद में क्षत्रियों ने विशाल रैली आयोजित की। उसमें समाज को मैसेज दे दिया गया कि ईडी-सीबीआई से डरना नहीं है। समाज के प्रमुख नेता पीटी जडेजा ने कहा, भाजपा को वोट नहीं देना है। गुरुवार सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी आणंद पहुंचे। उन्होंने भी एक विशाल रैली को संबोधित किया। क्षत्रिय समाज की रैली में शहर के अलावा आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोगों ने शिकरत की। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में शहरी लोगों की संख्या अधिक रही। रैली, दो घंटे देरी से शुरू हुई थी।  


आणंद लोकसभा क्षेत्र के बोरसद गांव में ईश्वर भाई कहते हैं, भाजपा ने बेवजह इस सीट को फंसा दिया है। गुजरात में लंबे समय से क्षत्रियों ने भाजपा का साथ दिया है। अब परषोत्तम रूपाला ने गलत बयान दिया, तो पार्टी उसका साथ दे रही है। क्षत्रियों की एक ही मांग थी, रूपाला को चुनाव मैदान से हटाया जाए। भाजपा ने यह मांग नहीं मानी। नतीजा, क्षत्रिय समाज में रूपाला का मामला विकराल रूप धारण कर गया। इस विरोध का कोई नेतृत्व नहीं कर रहा। यह विरोध अब हर घर तक पहुंच चुका है। लोग अपने संसाधनों से रैलियों में आ रहे हैं। क्षत्रियों के विरोध का खामियाजा भाजपा प्रत्याशी को भुगतना पड़ेगा। आणंद लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला हो गया है। हालांकि कई लोग, इस मुकाबले को अब 60/40 के हिसाब में देख रहे हैं। उनके मुताबिक, भाजपा उम्मीदवार इस सीट पर पिछड़ सकता है।


केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला द्वारा क्षत्रिय समाज पर की गई टिप्पणी का असर दूसरी सीटों पर भी देखने को मिल रहा है। आणंद लोकसभा सीट पर बुधवार को क्षत्रिय समाज ने 'क्षत्रिय अस्मिता महासम्मेलन' आयोजित किया। ग्रामीण इलाकों में क्षत्रिय समाज का बाहुल्य है। कांग्रेस पार्टी ने इस स्थिति का भरपूर फायदा उठाते हुए यहां पर क्षत्रिय समाज से आने वाले बड़े नेता अमित चावड़ा को टिकट दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि क्षत्रिय समाज का विरोध प्रदर्शन चावड़ा को जीत तक पहुंचा सकता है। भाजपा ने पाटीदार समुदाय के मितेश पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बार क्षत्रिय समुदाय का विरोध, भाजपा उम्मीदवार की राह को मुश्किल बना सकता है। 2019 के जनादेश को देखें, तो भाजपा उम्मीदवार मितेशभाई पटेल ने आणंद सीट पर 6,33,097 वोट हासिल कर जीत दर्ज कराई थी। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी भरतसिंह एम सोलंकी को करीब दो लाख वोटों के अंतर से हराया था। सोलंकी को 4,35,379 वोट मिले थे। इससे पहले का जनादेश यानी 2014 का चुनाव देखें, तो भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई मणिभाई पटेल ने 4,90,829 वोट लिए थे। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार भरतसिंह सोलंकी को हराया था। सोलंकी को 4,27,403 वोट मिले थे। तब जीत का अंदर ज्यादा बड़ा नहीं था।


विद्यानगर में कारोबारी भाजपा से जुड़े एक पदाधिकारी ने भरोसे में बताया, देखिये इधर भाजपा ने तो खुद ही जोखिम मोल ले लिया है। 2014 और 2019 वाली स्थिति आज नहीं है। 2019 में अगर भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर करीब दो लाख था, तो आज क्षत्रियों के विरोध से वह अंतर पूरी तरह से गायब भी हो सकता है। गुजरात में कम से कम सात लोकसभा सीटों पर क्षत्रियों का प्रभाव है, भले ही वह हार-जीत के लिए निर्णायक न हों। आणंद सीट पर उनकी नाराजगी मायने रखती है। भाजपा का प्रत्याशी पाटीदार है, तो कांग्रेस उम्मीदवार क्षत्रिय है। अब स्थिति को समझा जा सकता है। ठीक है शहर में भाजपा, वोट ले लेगी, लेकिन गांवों में क्या होगा। शहर में भी मुस्लिम समुदाय है, क्षत्रिय हैं, पटेल हैं, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति के लोग भी हैं। अधिकांश गांवों में क्षत्रियों का दबदबा है। वे दूसरी जातियों के साथ भाजपा के विरोध के लिए तालमेल बैठा रहे हैं। गांव में यह प्रयोग संभव है। अगर ऐसा होता है, तो भाजपा के लिए जीत मुश्किल होगी। भाजपा ने राजकोट सीट से रूपाला को नहीं हटाया। वहां पर पार्टी को लगता है कि वह क्षत्रिय विरोध को दरकिनार कर जीत तक पहुंच सकती है। दूसरी जातियों का समीकरण उसे जीत तक ले जा सकता है, मगर आणंद में ऐसा नहीं है। अब मोदी ही संकटमोचक हैं। चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि लोगों ने उनकी बात मानी या नहीं। बड़ी बात तो ये है कि कांग्रेस प्रत्याशी भी क्षत्रिय समाज से है।


आणंद लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें खंभात, बोरसाद, आंकलाव, आणंद, सोजित्रा, पेटलाद और उमरेठ शामिल हैं। यहां के जातिगत समीकरण में क्षत्रिय-ठाकुर वोटरों की संख्या ज्यादा है। इनके बाद पाटीदार, मुस्लिम, बनिया और ब्राह्मण मतदाता हैं। पाटीदार समाज की उपजातियां भी हैं। बुधवार को हुए क्षत्रिय सम्मेलन में पीटी जडेजा सहित कई लोगों ने भाजपा को वोट न देने की अपील की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन का एलान कर दिया। अरडी गांव में क्षत्रिय समाज के प्रमुख, सुरेंद्र सिंह सोलंकी बताते हैं, रूपाला के मुद्दे ने क्षत्रिय समाज को एकजुट कर दिया है। रूपाला की पत्नी को टिकट दे देते तो कोई बात नहीं थी, लेकिन भाजपा उनके अहंकार के सामने नहीं टिक सकी। दूसरी जातियों के लोग हमारे साथ आ रहे हैं। हम भाजपा का विरोध करेंगे। भाजपा ने श्रीराम मंदिर की कमेटी में किसी क्षत्रिय को नहीं रखा। भगवान राम कौन थे, क्या ये भाजपा नहीं जानती। सोलंकी ने कहा, भाजपा वाले राम मंदिर पर वोट मांग रहे हैं। उनके साथ बैठे गांव के सरपंच शांतिलाल सोलंकी ने कहा, रूपाला की एक गलती ने राम मंदिर का मुद्दा गायब कर दिया। बसंती सिंह ने कहा, चुनाव में अब तो नारी सम्मान का ही बड़ा मुद्दा है। चुनाव में भाजपा को संकट झेलना पड़ेगा।


कांग्रेस उम्मीदवार अमित चावड़ा, आणंद जिले के लिए जाना पहचाना नाम है। वे अभी तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव को मिलाकर वे पांच बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें गुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सौंपी। वे सदन में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आणंद में रैली की। उन्होंने क्षत्रिय समाज को लेकर कुछ नहीं कहा। पीएम ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, एक चायवाले ने दुनिया में देश की इकॉनमी को 11वें नंबर से 5वें स्थान पर पहुंचा दिया है। गुजरात में कांग्रेस मर रही है तो पाकिस्तान रो रहा है। पाकिस्तान का प्रयास है कि भारत में कमजोर सरकार बने।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज पाकिस्तान में आतंक का टायर पंचर हो गया है। जो देश कभी आतंकी एक्सपोर्ट करता था, आज वो आटे के आयात के लिए दर-दर भटक रहा है। जिसके हाथ में कभी बम था, उसके हाथ में आज भीख का कटोरा है। कांग्रेस की कमजोर सरकार, आतंक के आकाओं को डॉजियर देती थी। लेकिन मोदी की मजबूत सरकार आतंकियों को घर में घुसकर मारती है। मोदी ने कहा, पाकिस्तान और कांग्रेस की पार्टनरशिप अब पूरी तरह एक्सपोज हो गई है। कांग्रेस ने एससी एसटी समुदाय की कभी चिंता नहीं की।  

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