Palam Seat: दक्षिणी दिल्ली में पड़ने वाली इस सीट पर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। आप ने यहां से मौजूदा विधायक भावना गौड़ का टिकट काटकर जोगिंदर सोलंकी और भाजपा ने कुलदीप सोलंकी को टिकट दिया है। आप से टिकट कटने के बाद भावना गौड़ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
दिल्ली में विधानसभा चुनावों में मतदान 5 फरवरी को होगा। 8 फरवरी को नतीजे आएंगे। पालम विधानसभा सीट दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट पर इस बार कुल 259338 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 136950 पुरुष और 122382 महिलाएं हैं बाकि 6 अन्य मतदाता है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में पालम में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…
दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। इसके बाद दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। फिर दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था, जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।
इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।
कैसा रहा पालम सीट का इतिहास
पालम में पहली बार चुनाव 1972 में हुए थे। इस समय कांग्रेस के मांगे राम ने भारतीय जनसंघ के रामधन को 8101 वोट से हराया।
1977 में हुए चुनावों में जनता पार्टी के एल सिंह ने कांग्रेस के फूल सिंह को 1641 वोट से हराया।
1983 में कांग्रेस के मुख्तियार सिंह ने लोकदल को सूरत सिंह यादव को 1183 वोट से हराया।
1993: पहली बार पालम में चुनाव
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। 1993 में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे तौर पर टक्कर थी। भाजपा के धरम देव सोलंकी ने कांग्रेस के मुख्तियार सिंह को 4058 वोट से हराया।
1998: कांग्रेस के महेंदर यादव को मिली जीत
साल 1998 के चुनावों में कांग्रेस के महेंदर यादव ने भाजपा के धरम देव सोलंकी को 5547 वोट से हराया। इस बार कांग्रेस ने अपना चेहरा बदलकर चुनावों को अपने नाम कर लिया था।
2003: धरम देव सोलंकी की सीट पर वापसी
2003 में एक बार फिर इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। भाजपा धरम देव सोलंकी के कांग्रेस के सुमेश को 2317 वोट से हराकर सीट पर वापसी की।
2008: धरम देव सोलंकी की एक और जीत
2008 में भाजपा के धरम देव सोलंकी ने फिर से जीत दर्ज की और कांग्रेस के महेंदर यादव को 12593 वोट से हरा दिया था।
2013: भाजपा को मिली जीत
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। पालम विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। पालम सीट पर आप की उम्मीदवार नहीं जीत पाई थी। भाजपा के धरम देव सोलंकी ने आप की भावना गौड़ को 8372 वोट से हराया।
2015: आप की भावना गौड़ को जीता
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया। इसकी वजह फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो केजरीवाल ने दिल्ली का सीएम पद छोड़ दिया। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। इस चुनाव में पालम सीट पर नतीजे पलट गए। ये नतीजे आप के पक्ष में आए। आप की भावना गौड़ ने भाजपा के धर्म देव सोलंकी को 30849 वोट से हरा दिया। आप को 82637 और भाजपा को 51788 वोट मिले।
2020 आप ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। पालम सीट पर नतीजों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। इस सीट पर आप का भावना गौड़ ने जीत दर्ज की। आप की भावना गौड़ ने भाजपा के विजय पंडित को 32,765 वोट से हराया। आप को 92775 और भाजपा को 60010 वोट मिले थे।
अबकी बार कैसे हैं समीकरण?
2025 के चुनावों में आप मौजूदा विधायक भावना गौड़ का टिकट काट दिया है। आप ने यहां से जोगिंदर सोलंकी भाजपा ने कुलदीप सोलंकी और कांग्रेस ने मांगे राम को टिकट दिया है।