बिहार में मंगलवार को दूसरे चरण का मतदान होना है। जिन इलाकों में इस चरण में वोटिंग है, उसमें मगध प्रमंडल की सभी सीटें शामिल हैं। इस प्रमंडल में पांच जिलों की 26 विधानसभा सीटें आती हैं।
अमर उजाला की इस सीरीज में हम आपको बिहार के नौ प्रमंडलों के पिछले चुनावी नतीजों के बारे में बता रहे हैं। आज बात मगध प्रमंडल की करेंगे। इस प्रमंडल में अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया और नवादा जिला शामिल है।
मगध प्रमंडल का सियासी समीकरण कैसा है? पिछली बार यहां कैसे नतीजे रहे थे? 2020 के पहले के चुनावों में यहां किसने बाजी मारी? इस बार की चर्चित सीटें कौन सी हैं? आइये जानते हैं…
मगध क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या है?
मगध प्रमंडल में पांच जिले आते हैं। इनमें अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया और नवादा शामिल हैं। इन पांच जिलों में बिहार विधानसभा की कुल 26 सीटें हैं। मगध में सबसे ज्यादा 10 सीटें गया जिले में हैं। इसके बाद औरंगाबाद में छह, नवादा में पांच, जहानाबाद में तीन और अरवल में दो सीटें हैं।
2020 में कैसे रहे थे नतीजे?
2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच में था। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं थीं। इनमें सबसे ज्यादा 74 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जदयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीट पर सफलता मिली थी। राज्य की 110 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं। 75 सीटें जीतकर राजद राज्य की सबसे बड़ा दल बना था। इसके साथ ही कांग्रेस को 19, वामदलों को 16 सीट पर जीत मिली थी। इनमें 12 सीटें भाकपा (माले) और दो-दो सीटें भाकपा और माकपा के खाते में गईं थी। अन्य दलों की बात करें तो एआईएमआईएम ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीट पर जीत मिली थी।
2020 में मगध प्रमंडल में किसे मिली थी बढ़त?
2020 के चुनाव में भले ही महागठबंधन को हार मिली थी। लेकिन मगध प्रमंडल में राजद ने अपना दबदबा बरकरार रखा था। इस प्रमंडल में महागठबंधन के खाते में 20 सीटें गईं थीं। वहीं, एनडीए को छह सीटों से संतोष करना पड़ा था। दलवार आंकड़ों की बात करें तो महागठबंधन में शामिल राजद को 15 सीटें, कांग्रेस को तीन और भाकपा (माले) को दो सीटें मिली थीं। एनडीए में भाजपा को महज तीन सीटें हासिल हुईं। जबकि उसकी साथी जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (हम) यहां तीन सीटें पाने में सफल रही। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को मगध प्रमंड में एक भी सीट नहीं मिली थी।
2015 में कैसे थे नतीजे?
प्रदेश में 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच में मुकाबला हुआ। इस चुनाव में महागठबंधन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी भी शामिल थी। जदयू के अलावा राजद और कांग्रेस ने साथ मिलकर यह चुनाव लड़ा। वहीं, एनडीए में भाजपा के साथ लोजपा, जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा शामिल थे।
इस चुनाव में महागठबंधन ने 178 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, एनडीए को 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वाम दलों के खाते में तीन सीटें गईं थी। दलवार आंकडे़ की बात करें तो राजद को सबसे ज्यादा 80 सीटें मिली थीं। जदयू के खाते में 71 और कांग्रेस को 27 सीटों पर सफलता मिली थी। एनडीए में सबसे ज्यादा 53 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। लोजपा और रालोसपा को दो-दो और हम को एक सीट जीतने में सफलता मिली थी। वाम दलों में तीनों सीटें भाकपा (माले) ने जीती थीं। बाकी चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे थे।
2015 में मगध प्रमंडल का कैसा था नतीजा?
2015 में महागठबंधन को मगध प्रमंडल की 20 सीटें मिली थीं। एनडीए छह सीटें जीतने में सफल रहा था। दलवार आंकड़ों की बात करें तो महागठबंधन से राजद ने 10 सीटें जीतीं थीं। वहीं, जदयू को छह सीटों पर जीत मिली, कांग्रेस ने चार सीट हासिल कीं। दूसरी तरफ एनडीए में भाजपा को इस क्षेत्र में पांच सीटों से संतोष करना पड़ा। उसकी साथी हम को भी एक ही सीट मिली थी।
2010 में कैसे थे नतीजे?
2008 में परिसीमन के बाद यहां 2010 में पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में एकतरफा एनडीए को जीत मिली थी। एनडीए में जदयू और भाजपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था। वहीं राजद और लोजपा साथ थे। वहीं, कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में एनडीए को 243 में से 206 सीटों पर एकतरफा जीत मिली। राजद-लोजपा गठबंधन को महज 25 तो कांग्रेस को चार सीटों से संतोष करना पड़ा। बाकी सात सीटों में से छह निर्दलियों के खाते में गई। वहीं, चकाई सीट पर झामुमो के सुमित कुमार सिंह जीते थे। दलवार आंकड़ों की बात की जाए तो एनडीए की 206 सीटों में से 115 जदयू और 91 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। वहीं, राजद को 22 और लोजपा को 3 सीटों पर जीत मिली थी।
2010 में मगध प्रमंडल के नतीजे कैसे थे?
2010 के विधानसभा चुनाव में मगध प्रमंडल में भी एनडीए को बड़ी जीत मिली थी। एनडीए इस प्रमंडल की 26 में से 24 सीटें जीतने में सफल रहा था। बाकी दो सीटों में से बेलागंज सीट पर राजद के सुरेंद्र प्रसाद यादव और ओबरा सीट पर निर्दलीय सोमप्रकाश सिंह जीते थे। एनडीए में दलवार आंकड़ों की बात करें तो भाजपा को 8 सीटें, जदयू ने 16 सीटों पर जीत मिली थी।
मगध प्रमंडल की चर्चित सीटें
इमामगंज: यहां से कई बड़े चेहरे जीतते आए हैं। यहां से 2005 से 2015 तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे उदय नारायण चौधरी पांज बार जीते थे। 2015 में वह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से हार गए थे। 2024 में जीतन राम मांझी लोकसभा पहुंच गए। उपचुनाव में यहां से जीतन राम की बहू दीपा मांझी को जीत मिली। 2025 के लिए भी एनडीए ने दीपा को यहां से टिकट दिया है।
बाराचट्टी: यहां से हम की ज्योति देवी विधायक हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं। मौजूदा विधायक ज्योति देवी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की समधन हैं। जीतन राम मांझी की बेटी की शादी ज्योति देवी के बेटे से हुई है।
बेलागंज: यहां से जदयू की मनोरमा देवी विधायक हैं। वह इससे पहले विधान परिषद सदस्य थीं। इस सीट से आठ बार के विधायक सुरेंद्र प्रसाद यादव के लोकसभा जाने के बाद 2024 में यहां उपचुनाव हुआ जिसमें मनोरमा देवी ने सुरेंद्र प्रसाद यादव के बेटे और राजद उम्मीदवार विश्वनाथ कुमार सिंह को हरा दिया था। इस बार भी लड़ाई मनोरमा देवी को विश्वनाथ कुमार सिंह के बीच है।
गया टाउन - प्रेम कुमार इस सीट से नौ बार भाजपा के टिकट पर जीत चुके हैं। 1990 से लगातार प्रेम कुमार यहां जीतते आ रहे हैं। वह नीतीश सरकार में अलग-अलग विभागों में मंत्री भी रह चुके हैं। एक बार फिर वह भाजपा के टिकट पर एनडीए के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन से अखौरी ओंकार नाथ मैदान में है वहीं जनसुराज ने यहां से धीरेन्द्र अग्रवाल को टिकट दिया है।
नबीनगर- बुहबली आनंद मोहन के बेटे की वजह से यह सीट चर्चा में आई है। यहां से जदयू के चेतन आनंद मैदान में है। पिछली बार वह राजद के टिकट पर शिवहर से जीते थे। लेकिन इस बार वह जदयू के टिकट से मैदन में हैं। नबी नगर से चेतन आनंद की मां लवली आनंद 1996 में उपचुनाव जीत चुकी हैं। राजद ने आमोद कुमार सिंह और जनसुराज ने यहां से अर्चना चंद्रा को मैदान में उतारा है।
नवादा- यह सीट दो परिवारों की लड़ाई के कारण चर्चा में बनी हुई है। इस सीट से गायत्री देवी और राज बल्लभ यादव के परिवार के सदस्य पांच-पांच बार विधायक रहे हैं। वर्तमान में राज बल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी यहां से विधायक हैं। राजद ने इस बार कौशल यादव को मैदान में उतारा है। वह गायत्री देवी के पुत्र हैं। वहीं जदयू ने वर्तमान विधायक विभा देवी को मैदान में उतारा है। जनसुराज ने अनुज सिंह को टिकट दिया है।