शांतनु नायडू मुंबई के रहने वाले हैं। शांतनु नायडू का जन्म 1993 में पुणे महाराष्ट्र में हुआ था। अपनी प्रतिभा और समाज सेवा के दम पर रतन टाटा के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहे। दरअसल, शांतनु नायडू ने आवारा कुत्तों के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर बनाए थे, ताकि अंधेरे में वाहन चालकों को वे दिख सकें और टक्कर न हो पाए। इस बारे में पता चलने के बाद रतन टाटा ने नायडू को बुलाया।
तब पहली बार रतन टाटा और शांतनु नायडू की 2014 में मुलाकात हुई। उन्होंने शांतनु को उनके साथ काम करने का ऑफर भी दिया। बता दें कि शांतनु नायडू ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। इसके बाद वह चेयरमैन ऑफिस में डिप्टी जनरल मैनेजर के तौर पर टाटा ट्रस्ट में शामिल हो गए। चर्चा है कि रतन टाटा ने खुद उन्हें फोन करके कहा था कि तुम मेरे असिस्टेंट बनोगे। शांतनु नायडू अब रतन टाटा के ऑफिस में जनरल मैनेजर के तौर पर काम करते हैं। वह रतन टाटा को नए स्टार्टअप में निवेश को लेकर सलाह भी दिया करते थे। शांतनु की पहचान एक इंजीनियर, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, उद्यमी और लेखक के तौर पर भी है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए शांतनु नायडू टाटा समूह में काम करने वाले अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं। 2016 में शांतनु नायडू अमेरिका में कॉर्नेल विश्वविद्यालय में एमबीए करने गए। जब उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की और 2018 में वापस आए, तो उन्होंने चेयरमैन ऑफिस में डिप्टी जनरल मैनेजर के रूप में टाटा ट्रस्ट में शामिल हो गए। शांतनु, रतन टाटा को स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बिजनेस टिप्स देते थे। शांतनु नायडू ने बिजनेस इंडस्ट्री में एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो कई लोगों के लिए हमेशा एक सपना होता है।