अपनी बात कहने का हौसला
अगर आप किसी की नाराजगी के डर से अपनी जरूरतें छिपा रहे हैं, तो आपको इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है। जैसे, अगर आप ऑफिस में वेतन बढ़ाने की बात करना चाहते हैं, लेकिन बॉस के नाराज होने के डर से चुप रहते हैं, तो आप खुद का ही नुकसान कर रहे हैं। बॉस क्या सोचेंगे, इस पर ध्यान देने की बजाय सोचिए कि आप वेतन क्यों बढ़वाना चाहते हैं? इसके उचित कारणों के साथ उनसे बात करें। जब आप अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर ऐसा करेंगे, तो आपके अंदर बात कहने का हौसला भी बढ़ेगा।
लोगों को खोने का डर
कई बार यह आदत इस वजह से भी होती है कि आपको डर होता है कि कहीं उस इन्सान से आपके रिश्ते बिगड़ न जाएं। अक्सर इसी डर से आप अपनी जरूरतें भुलाकर दूसरों की हर बात मानते जाते हैं। कई बार यह आदत बचपन के बुरे अनुभव, परिवारिक समस्याएं या मानसिक आघात की वजह से भी बन जाती है। अगर आपको लगता है कि लोगों को खुश करने की आदत आपकी खुशियों, रिश्तों या मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है और चाहकर भी आपको इससे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है, तो किसी अच्छे सलाहकार या थेरेपिस्ट से मदद लेने में झिझक न दिखाएं।