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एनसीटी बिल 2021 : दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 क्या है?

Mon, 29 Mar 2021 06:56 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • देश के नौ केंद्र शासित प्रदेशों में से दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाता है। 
  • दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में अनुच्छेद 239 लागू होता है। 
  • 1991 में संविधान में 69वां संशोधन किया गया था, जिसके बाद दिल्ली के लिए अनुच्छेद 239AA और अनुच्छेद  239AB को लाया गया। 
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दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 - फोटो : iStock
हाल ही में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में एक बड़ा टकराव देखने को मिला। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में संघीय सरकार और राज्य सरकारों के अधिकारों और शक्तियों के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमे अधिकतर सवाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र, राज्यपाल और संबंधित राज्य के मंत्रिमंडल के अधिकार और उनकी शक्तियों तथा विशेषाधिकारों से जुड़े होते हैं। 
केंद्र सरकार ने 22 मार्च, 2021 को संसद में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 पारित कराया था। इस विधेयक को लेकर देश की राजधानी की सियासत में अच्छा खासा उबाल देखने को मिला। दिल्ली सरकार और संसद में विपक्षी दलों ने इस विधेयक को काला कानून बताते हुए लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया था। कई विपक्षी दलों ने संसद में इस संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ वॉकआउट किया था। 
जबकि केंद्र सरकार का तर्क था कि यह विधेयक कोई नया विधेयक नहीं है और इसे 1991 में लाया गया था। हम केवल इसमें जरूरी संशोधन कर रहे हैं। जिनसे, दिल्ली सरकार सुचारू रूप से चल सकेगी। खैर, संशोधन विधेयक लाने की असल वजह कुछ भी लेकिन इसे लेकर सियासत जोरों पर है। हम सभी के मन में कई तरह के सवाल हैं जैसे कि इस विधेयक से क्या बदलेगा? केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार में टकराव घटेगा या अधिक बढ़ेगा साथ ही विधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की सरकार और उपराज्यपाल की शक्तियों में क्या बदलाव होंगे। इस खबर को पढ़कर आप अपनी तैयारी और अधिक शानदार बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं इन प्रमुख सवालों के जवाब ...
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दिल्ली का बॉस कौन - फोटो : अमर उजाला
क्या दिल्ली एक पूर्ण राज्य है? 
  • नहीं, दिल्ली एक सामान्य या अन्य राज्यों की तरह पूर्ण राज्य नहीं है। 
  • 69वें संविधान संशोधन के तहत दिल्ली विधानसभा युक्त एक केंद्र शासित प्रदेश है। 
  • हालांकि, यहां अन्य राज्यों की भांति विधानसभा चुनाव तो होते हैं, लेकिन दिल्ली विधानसभा और सरकार के पास अधिकार सीमित हैं।   
क्या है 69वां संविधान संशोधन?
  • 69वें संविधान संशोधन (1991) के तहत दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया। 
  • दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए 70 सदस्यीय विधानसभा और सात मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया था। 
क्या है पुराना कानून?
  • देश के नौ केंद्र शासित प्रदेशों में से दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाता है। 
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में अनुच्छेद 239 लागू होता है। 
  • 1991 में संविधान में 69वां संशोधन किया गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए अनुच्छेद 239AA और अनुच्छेद  239AB को लाया गया। 
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दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021, - फोटो : Amar Ujala Graphics
 अनुच्छेद 239AA क्या है?
  • इसके तहत दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT of Delhi) का दर्जा दिया गया है। 
  • इसके प्रशासक एलजी यानी उपराज्यपाल हैं। 
  • संविधान के 239ए अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति दिल्ली के लिए उपराज्यपाल की नियुक्ति करते हैं। 
  • दिल्ली में चुनाव कराने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग के पास है। 
  • उपराज्यपाल निर्वाचित मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। 
  • दिल्ली के उपराज्यपाल के पास अन्य राज्यपालों की तुलना में अधिक शक्तियां हैं।
  • दूसरे राज्यों की तरह दिल्ली सरकार के पास पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि संबंधी अधिकार नहीं हैं। 
  • दिल्ली विधानसभा पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि संबंधी कानून नहीं बना सकती है।
  • ये तीनों अधिकार केंद्र सरकार और संसद के अधीन हैं।
  • मान लीजिए कि दोनों यानी केंद्र और दिल्ली सरकार किसी मुद्दे पर कानून बनाती है, तो केंद्र सरकार का ही कानून दिल्ली में लागू होगा।
  • किसी मुद्दे पर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के फैसले में मतभेद है तो उपराज्यपाल मामला राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। 
  • आपात स्थिति यानी इमरजेंसी की स्थिति में उपराज्यपाल फैसले ले सकते हैं। 

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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
2018 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?
  • अनुच्छेद 239AA के तहत पुलिस, कानून व्यवस्था और दिल्ली के अधीन आने वाली जमीन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। 
  • इस मामले में विवाद होने पर 2018 में सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की एक पीठ ने अहम निर्णय दिया था। 
  • फैसले के अनुसार दिल्ली सरकार को पुलिस, कानून व्यवस्था और जमीन के अलावा अन्य किसी भी मुद्दे पर उपराज्यपाल की सहमति लेना जरूरी नहीं है। 
  • हालांकि, दिल्ली सरकार को अपने निर्णयों की सूचना आवश्यक तौर पर उपराज्यपाल को देनी होगी। 
  • उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के उपराज्यपाल की भूमिका को प्रशासक तक सीमित बताया था।
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दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 - फोटो : Amar Ujala Graphics
तो अनुच्छेद 239AB क्या है?
  • इस अनुच्छेद की शक्तियां आपातकालीन यानी इमरजेंसी की स्थिति में लागू होती है। 
  • यदि उपराज्यपाल को लगता है कि मंत्रिमंडल, सरकार का संचालन करने में अक्षम है तो वह राष्ट्रपति को आपात स्थिति लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। 
संशोधन विधेयक 2021 के प्रावधान 
  • नए विधेयक के तहत दिल्ली में ‘सरकार’ शब्द का आशय  ‘उपराज्यपाल’ होगा। 
  • दिल्ली विधानसभा द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी कानून में संदर्भित ‘सरकार’ का अर्थ ‘उपराज्यपाल’ (LG) से होगा।
  • इसमें उपराज्यपाल के विवेक के अधीन शक्तियों का विस्तार किया गया है। 
  • संशोधन विधेयक उपराज्यपाल को उन मामलों में भी और अधिक विवेकाधीन शक्तियां देता है।
  • यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि दिल्ली में दिल्ली मंत्रिमंडल द्वारा लिए जाने वाले किसी भी निर्णय को लागू करने से पूर्व उपराज्यपाल से विमर्श करना जरूरी है। 
  • वहीं, दिल्ली विधानसभा राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक मामलों पर विचार करने अथवा प्रशासनिक निर्णयों के संबंध में स्वयं को ताकतवर करने के लिए कोई नियम नहीं बनाएगी।
  • विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि उक्त विधेयक विधानसभा और कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का संवर्द्धन करेगा।
  • साथ ही निर्वाचित सरकार एवं उपराज्यपाल के उत्तरदायित्वों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के शासन की संवैधानिक योजना के अनुरूप परिभाषित करेगा।
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गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी(फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
  • हालिया वर्षों में कई बार दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल की शक्तियों में टकराव के मामले सामने आए थे। 
  • 1991 के अधिनियम में प्रक्रिया और कार्य संचालन से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
  • हालांकि, कई शक्तियों की स्पष्ट तौर पर व्याख्या नहीं की गई।
  • इस बारे में भी स्पष्टता नहीं है कि सरकार द्वारा आदेश जारी करने से पूर्व मामलों को किस प्रकार उपराज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करना जरूरी है।
  • फैसलों के प्रभावी समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए कोई संरचनात्मक तंत्र स्थापित नहीं किया गया है।
  • कई बार मसला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा और शीर्ष कोर्ट को टकराव के मुद्दों पर फैसला देना पड़ा। 
  • इस संशोधन विधेयक में दिल्ली के उपराज्यपाल की कुछ भूमिकाओं और अधिकारों को परिभाषित किया गया है। 
  • इस संशोधन का मकसद मूल विधेयक में जो अस्पष्टता है उसे दूर करना ताकि इसे लेकर विभिन्न अदालतों में कानून को चुनौती नहीं दी जा सके।
  • संशोधन के तहत दिल्ली सरकार को अब उपराज्यपाल को सभी निर्णयों, प्रस्तावों और एजेंडा की जानकारी देनी होगी। 
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