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Waqf Bill: भारत में कब हुआ था मुस्लिमों का सबसे बड़ा आंदोलन? एस्पिरेंट हैं तो जरूर पढ़ें इतिहास की ये घटना

Wed, 02 Apr 2025 05:11 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Waqf Amendment Bill 2025: अगर आप यूपीएससी, एसएससी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो वक्फ संशोधन विधेयक से जुड़े आंदोलन का अध्ययन करना जरूरी है। परीक्षा में भारतीय राजनीति, अल्पसंख्यक अधिकार, संवैधानिक प्रावधान और सामाजिक आंदोलन से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। विस्तृत विवरण नीचे पढ़ें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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Waqf Amendment Bill: केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 लोकसभा में पेश किए जाने के बाद देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। इस बिल का मकसद वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कानून के दायरे में लाना है, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य संगठनों ने इसका विरोध जताया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि अगर यह बिल पास होता है, तो वे इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करेंगे।
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यह पहली बार नहीं है जब मुस्लिम समाज किसी कानून के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहा है। भारत में मुस्लिमों का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन 1940 में हुआ था, जिसने देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला था। एस्पिरेंट्स के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय इतिहास, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ा है।

भारत में मुसलमानों का सबसे बड़ा आंदोलन

भारतीय इतिहास में मुसलमानों का सबसे बड़ा आंदोलन 1940 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा किया गया था, जब पाकिस्तान की मांग को लेकर संघर्ष तेज हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व मोहम्मद अली जिन्ना ने किया, जिन्होंने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र की मांग को स्पष्ट रूप से रखा। हालांकि, इस विचार की नींव पहले ही रखी जा चुकी थी।

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और पाकिस्तान की मांग

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई थी, जिसका उद्देश्य शुरू में भारत में मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करना था। लेकिन 1930 के दशक में, डॉ. सर अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने एक अलग मुस्लिम राष्ट्र की अवधारणा प्रस्तुत की, जिससे मुस्लिम लीग ने इस दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए। 1940 में लाहौर में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में पाकिस्तान की मांग को मजबूती से उठाया गया, जो आगे चलकर विभाजन का आधार बना।
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मुहम्मद अली जिन्ना और आंदोलन का नेतृत्व

1940 के लाहौर अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। जिन्ना, जो पहले हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे, इस प्रस्ताव के बाद पूरी तरह अलग राष्ट्र की मांग पर अडिग हो गए। लाहौर के मिंटो पार्क (अब इकबाल पार्क) में हुए इस अधिवेशन में एके फजलुल हक ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। यही वह क्षण था जब पाकिस्तान की मांग एक राजनीतिक आंदोलन में बदल गई।

लाहौर अधिवेशन के बाद जिन्ना का बदला रुख

इससे पहले, चौधरी रहमत अली ने 1933 में "पाकिस्तान" शब्द का इस्तेमाल किया और इसे एक अलग देश बनाने की मांग की। हालाँकि, 1940 के लाहौर प्रस्ताव के बाद जिन्ना का रुख पूरी तरह बदल गया। विभाजन की मांग अब केवल एक विचार न रहकर, एक स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा बन गई। इसका परिणाम 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के रूप में सामने आया, और जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने।
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