मुहम्मद अली जिन्ना और आंदोलन का नेतृत्व
1940 के लाहौर अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। जिन्ना, जो पहले हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे, इस प्रस्ताव के बाद पूरी तरह अलग राष्ट्र की मांग पर अडिग हो गए। लाहौर के मिंटो पार्क (अब इकबाल पार्क) में हुए इस अधिवेशन में एके फजलुल हक ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। यही वह क्षण था जब पाकिस्तान की मांग एक राजनीतिक आंदोलन में बदल गई।
लाहौर अधिवेशन के बाद जिन्ना का बदला रुख
इससे पहले, चौधरी रहमत अली ने 1933 में "पाकिस्तान" शब्द का इस्तेमाल किया और इसे एक अलग देश बनाने की मांग की। हालाँकि, 1940 के लाहौर प्रस्ताव के बाद जिन्ना का रुख पूरी तरह बदल गया। विभाजन की मांग अब केवल एक विचार न रहकर, एक स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा बन गई। इसका परिणाम 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के रूप में सामने आया, और जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने।