कार्यकाल कितना होता है?
भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है। कार्यकाल पूरा होने के बाद वह चाहें तो फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। अगर किसी कारणवश नया उपराष्ट्रपति समय पर नहीं चुना जा सके, तो वर्तमान उपराष्ट्रपति तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक अगला व्यक्ति कार्यभार नहीं संभाल लेता।
चुनाव कैसे होता है?
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य करते हैं। इस चुनाव में जनता या राज्य विधानसभा के विधायक वोट नहीं डालते। मतदान गुप्त रूप से (Secret Ballot) होता है। सांसद उम्मीदवारों को उनकी पसंद के अनुसार प्राथमिकता (1, 2, 3...) देते हैं। इसी प्रणाली को कहते हैं - प्राथमिकता आधारित मतदान प्रणाली (Preferential Voting System)।
उपराष्ट्रपति बनने के लिए ये होनी चाहिए योग्यता
उपराष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए और उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही उसमें राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा, वह किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर नहीं होना चाहिए, जैसे कि सरकारी नौकरी या कोई वेतनभोगी पद। इन सभी शर्तों को पूरा करने पर ही कोई उम्मीदवार उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्य माना जाता है।
उपराष्ट्रपति की भूमिका
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति (Chairman) होता है और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना उसकी जिम्मेदारी होती है। इसके अलावा, अगर राष्ट्रपति अस्थायी रूप से अनुपस्थित हों - जैसे इस्तीफा दे दें, मृत्यु हो जाए या अयोग्य घोषित हो जाएं - तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में देश की जिम्मेदारी संभालते हैं।