उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि आईआईटी दिल्ली आज देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल एक ब्रांड है। संस्थान ने कई वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, शिक्षक देकर दुनिया में अलग पहचान बनाई है। कोरोना संकट में सबसे सस्ता जांच किट, वेंटिलेटर, पीपी किट, सैनिटाइजर बनाकर अपना योगदान दिया है। इसलिए मैं संस्थान से आग्रह करता हूं कि आप रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले मेधवी युवाओं को शिक्षित-प्रशिक्षित करें।
उपराष्ट्रपति सोमवार को आईआईटी दिल्ली के डायमंड जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी से अधिक आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रमों की शुरुआत की जानी चाहिए, ताकि सस्ती और उपयोगी तकनीक के माध्यम से स्थाई समाधान पर काम हो।
आईआईटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाले अनुसंधान समाज के लिए प्रासंगिक होने चाहिए। इनका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से लेकर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों तक मानव जाति के समक्ष पेश आ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान की खोज होना चाहिए।
आईआईटी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में अपनी जगह तभी बना पाएंगे, जब वे समाज के लिए काम करेंगे। उनकी दिक्कतों का टिकाऊ व उत्कृष्ट समाधान देंगे। अनुसंधान का लक्ष्य लोगों के जीवन को सुगम बनाना, विकास को गति देना और अधिक समतामूलक विश्व व्यवस्था सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसलिए आईआईटी अब किसानों व ग्रामीण भारत की समस्याओं को दूर करने पर फोकस करें।
संस्थान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि पोष्टिक व प्रोटीन से भरपूर खाद्यान्न के उत्पादन पर भी ध्यान दें। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने संस्थान के 2030 तक की योजना और डायमंड जुबली चिह्नि भी जारी किया।
निजी क्षेत्र अनुसंधान व विकास परियोजनाओं में करें निवेश
उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज की समस्याओं का हल खोजने संबंधी अनुसंधान व विकास परियोजनाओं में और अधिक निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने निजी क्षेत्र से इस तरह की परियोजनाओं की पहचान करने और दिल खोलकर उनमें निवेश करने का आह्वान किया। इसमें फिक्की, नैसकॉम, एसोचैम आदि आकर मदद करें।
नई शिक्षा नीति से भारत बनेगा वैश्विक केंद्र
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में बढ़ावा देगी। उच्च स्तर की सस्ती शिक्षा उपलब्ध करवाएगी। इससे एक बार फिर से भारत को विश्व गुरू की भूमिका बनने में मदद होगी। दुनिया केसौ सर्वश्रेष्ठ उच्च शिक्षा संस्थानों को भारत में आकर कैंपस खोलने से उच्चतर मानदंड स्थापित होंगे।
60 वर्ष एक अहम पड़ाव
किसी भी संस्थान केजीवन यात्रा में 60 वर्ष महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। मैं आईआईटी दिल्ली से जुड़े पूर्व छात्रों, छात्रों और शिक्षकों को शुभकामना देता हूं। संस्थान ने 2019 में 153 पेटेंट्स के मुकाबले 2020 में 200 पेटेंट्स फाइल करने का लक्ष्य रखा है।