पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
पहली बार आयोजित वर्चुअल टाउनहॉल में अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें कम से कम तीन साल तक यूपीएससी की किसी भी परीक्षा में शामिल होने से रोकना और आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई करना शामिल है।
डॉ. कुमार ने कहा, "हम नहीं चाहते कि बच्चे अपने करियर की शुरुआत नकल से करें। नकल से केवल नुकसान होगा और यह आपके करियर को बर्बाद कर सकता है। इसलिए इस रास्ते पर बिल्कुल मत जाइए।"
पूजा खेड़कर का दिया उदाहरण
बातचीत के दौरान उन्होंने पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेड़कर का मामला भी याद दिलाया, जिन्हें पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दिव्यांग कोटे का गलत इस्तेमाल करने के कारण सेवा से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में भी आयोग “सबसे सख्त कार्रवाई” करता है।
पहचान सत्यापन और तकनीकी उपाय
डॉ. कुमार ने बताया कि नकल रोकने के लिए आधार को आवेदन प्रक्रिया से जोड़ा गया है और परीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथराइजेशन सिस्टम लागू किया गया है। आयोग अब उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र डिजिलॉकर के जरिए लेने की योजना भी बना रहा है ताकि उनकी प्रामाणिकता बनी रहे।
उम्र और प्रयास की सीमा पर स्थिति
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयु सीमा तय करने की कट-ऑफ तिथि बदलने या परीक्षा में प्रयासों की संख्या बढ़ाने-घटाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव आयोग के पास नहीं है।
सीसैट (CSAT) पर स्पष्टीकरण
डॉ. कुमार ने बताया कि सीसैट (सिविल सेवा एप्टीट्यूड टेस्ट) केवल क्वालीफाइंग पेपर है और इसके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाते। उम्मीदवारों को केवल 33% अंक लाकर इसे पास करना होता है।
मुंबई डब्बावालों से तुलना कर समझाई कार्यप्रणाली
आयोग की जटिल कार्यप्रणाली समझाते हुए उन्होंने यूपीएससी की तुलना मुंबई के डब्बावालों से की। उन्होंने कहा, "हर साल 12 लाख से अधिक उम्मीदवार आवेदन करते हैं। 23 भाषाओं और 48 वैकल्पिक विषयों में परीक्षा होती है। प्रत्येक अभ्यर्थी को उसकी पसंद का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, लेकिन जैसे डब्बावाले हर व्यक्ति तक उसका सही टिफिन पहुंचाते हैं, वैसे ही यूपीएससी भी हर उम्मीदवार को सही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराता है।"