भाई को भेजा अंतिम संदेश
उसके बड़े भाई वीरेन्द्र विक्रम ने पीटीआई को बताया, “शाम 6:51 बजे भाई का मैसेज आया- भैया, हम लिफ्ट में हैं। फंस गए हैं। करोल बाग मेगा मार्ट।’ उसके बाद अंतिम मैसेज था- ‘अब सांस फूल रहा। कुछ करो।’ मैंने तुरंत PCR को कॉल किया, लेकिन घंटों कोई मदद नहीं मिली।”
मदद देर से पहुंची
वीरेन्द्र ने कहा कि जब उन्होंने पुलिस को फोन किया, तब रात 9 बजे के आसपास ही कोई प्रतिक्रिया मिली। “तब तक कोई जानकारी नहीं थी, मैं बिल्कुल बेबस था। बस उम्मीद कर रहा था कि कोई समय पर पहुंच जाए।”
परिवार को नहीं था पता
वीरेन्द्र ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं था कि धीरेंद्र मॉल गया था। “वो कभी विशाल मेगा मार्ट नहीं गया था। हम सभी बनारस में थे। अगर उसने वो मैसेज न भेजा होता तो हमें पता भी नहीं चलता कि वो कहां है और कैसे मरा।”
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
वीरेन्द्र ने आरोप लगाया कि मॉल में कोई फायर अलार्म या फायर एग्जिट नहीं थे। “जब आग लगी तो मॉल ने लिफ्ट की बिजली काट दी, जिससे वह अंदर फंस गया और निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा।”
धीरेंद्र की दर्दनाक मौत
धीरेंद्र का शव पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा राहत दल की संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बरामद हुआ। वीरेन्द्र ने बताया, “जब मैंने उसके शव को देखा, तो उसकी नाक से खून निकल रहा था। ये साफ था कि उसने बहुत तकलीफ झेली। वह मेरा सब कुछ था।”
मां को नहीं दी गई खबर
वीरेन्द्र ने बताया कि उनकी मां अब भी बनारस में हैं और उन्हें अभी तक बताया नहीं गया है कि धीरेंद्र की मौत हो चुकी है। “वो सोच रही हैं कि वो घायल है। हम उन्हें सच्चाई नहीं बता पा रहे, वो बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।”
दमकल विभाग की जानकारी
आग की सूचना शाम 6:44 बजे दी गई थी। ये आग विशाल मेगा मार्ट की चार मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर फैली थी। दमकल विभाग के 13 वाहन और करीब 90 फायरकर्मी रेस्क्यू में लगाए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इमारत में वेंटिलेशन न होने से आग बुझाने में ज्यादा समय लगा। अभी तक आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है।