यूपीपीसीएस में कामयाबी हासिल करने का सपना पूरा करने के लिए छात्रों को सब कुछ त्यागकर अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख की तरफ ध्यान लगाना पड़ता है। संसाधनों के अभाव और पारिवारिक कठिनाइयों को हंसते-हंसते पार करने वाले मेधावी ही मंजिल पर पहुंच पाते हैं। यह कर दिखाया है छोटे शहरों से लेकर मध्यवर्ग तक के परिवार के इन होनहारों ने...
शायद दर्द ही बना परीक्षा में मददगार : अतुल कुमार, प्रदेश में प्रथम रैंक
पिछले वर्ष कोविड महामारी में मैंने अपनी मां को खो दिया। वे केवल 68 वर्ष की थीं, उनके मुश्किल समय में मैं उनके पास भी नहीं जा सका क्योंकि आवागमन पर प्रतिबंध लगे थे। यह बात मुझे हमेशा कचोटती रही। उनके निधन के बाद अपना ध्यान बंटाने के लिए मैंने यूपीपीसीएस पर ज्यादा जोर दिया। शायद यही वजह है कि प्रथम स्थान मिला।
आपको सुनकर शायद अजीब लगेगा, लेकिन उनके जाने के बाद जीवन में कई उपलब्धियां हासिल हुईं और मुझे लगता है इसके पीछे जरूर उनका कोई योगदान है। तैयारी के समय उनकी बहुत याद आती थी, पढ़ते हुए पुस्तक पर आंसू ढलकते, लेकिन फिर यह सोच कर हिम्मत जुटाता कि अगर मां होती तो वे क्या चाहतीं? बेशक मुझे परीक्षा में सफलता होते देखना चाहती।
कोविड में मां को खोया था...
पढ़ते समय आंसू आते तो सोचता ‘वे होती तो क्या चाहतीं?’
-अतुल कुमार सिंह
सफलता नहीं देख सकीं मां
मन में टीस बाकी है कि इसे देखने के लिए अब मां ही नहीं है। शायद यही जीवन और जीवन के हिस्से हैं। इन हालात में पिता और पत्नी पिंकी सिंह ने भी मेरा काफी हौसला बढ़ाया।
आईआईटी खड़गपुर से हैं बीटेक
अतुल आईआईटी खड़गपुर के छात्र रहे हैं। निजी नौकरी के साथ तैयारी कर 2019 में भी यूपीपीसीएस परीक्षा पास की थी। जिसमें बीडीओ के पद पर चयन हुआ था। फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर बने और इस समय कोयंबटूर में एसीएफ प्रशिक्षण ले रहे हैं।
माता-पिता : स्व. सावित्री और ओम प्रकाश, पिता उत्तर प्रदेश में सांख्यिकी अधिकारी रहे हैं।
सुझाव : सबसे पहले तो यह कि प्री को हल्के में न लें। इसकी बहुत पुख्ता तैयारी करें। वहीं मेन्स के लिए आपके पास हर टॉपिक पर कम से कम 10 ऐसे बिंदु होने चाहिए, जिन पर आपका जवाब आधारित होगा। जवाब में डायग्राम और चार्ट बनाएं, इससे समझाना आसान हो जाता है।
विफलता ने दिखाई राह : सौम्या मिश्रा, उन्नाव, 2वीं रैंक
मेरी सफलता की कहानी शुरुआत में मिले झटके से शुरू होती है। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में मास्टर्स में गोल्ड मेडलिस्ट थी, तो शायद कुछ घमंड आ गया था। लेकिन यूपीपीसीएस के पहले प्रयास में प्री में ही फेल हो गई तो समझ आया कि यहां पढ़ाई अलग ढंग से करनी होगी।
पहले प्रयास में इतनी बुरी तरह विफल होने पर आत्मविश्वास हिल गया, डिप्रेशन अलग हो गया। इनसे उबरना मुश्किल था, लेकिन फिर माता-पिता और शिक्षकों का सपोर्ट मिला, जिन्होंने फिर से प्रयास के लिए मुझमें उत्साह भरा। इसी का नतीजा है कि दूसरा स्थान हासिल कर सकी। इस समय में पीजीटी हूं, जल्द ही पीसीएस जॉइन करूंगी। मां रेणु गृहिणी हैं, पिता राघवेंद्र दिल्ली में पीजीटी शिक्षक।
सुझाव : नोट्स खुद बनाएं, किसी और के नोट्स शॉर्टकट हैं, जिनसे तैयारी में मजबूती नहीं आती। साथ ही खुद पर विश्वास बनाए रखें।
छठे प्रयास में सफलता : निशांत, जौनपुर, 4वीं रैंक
यह मेरा छठा प्रयास था। मेरा यही मानना है कि केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि योग और कसरत भी करते रहें। इससे आप एक ही काम करने की वजह से बोर नहीं होते। मैंने देखा है कि कई बार सफलता न मिलने पर अभ्यर्थी फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं। इससे बचने के लिए सबसे पहले तो सोशल मीडिया से दूर रहिए।
सुझाव : लक्ष्य के प्रति समर्पण, मेहनत और अनुशासन, यही आपको सफलता दिलाएंगे।
लिखने के तरीके ने दिलाया अंक : प्रवीण द्विवेदी, फतेहपुर, 6वीं रैंक
मेरा मानना है कि पीसीएस में सवालों के जवाब लिखने का तरीका अभ्यर्थियों को अच्छे अंक दिलवा सकता है। मुझे भी इससे काफी मदद मिली। तैयारियों के दौरान अभ्यास भी अच्छा हुआ। पीसीएस में छठा स्थान मिलने पर काफी खुशी हो रही है, लग रहा है कि कड़ी मेहनत का सही परिणाम मिला।
सुझाव : प्री के लिए रोजमर्रा की घटनाओं की समझ अभ्यर्थी को होनी चाहिए। इसके जरिए वह कई विषयों को कवर कर सकते हैं।
डॉक्टर परिवार से बनेंगे अधिकारी : डॉ. शशि शेखर, जौनपुर, 7वीं रैंक
वाराणसी में रह रहा मेरा परिवार चिकित्सकों का है, पत्नी डॉ. छवि भी चिकित्सक हैं। मैं 2019 व 2020 में यूपीएससी की परीक्षा के इंटरव्यू चरण तक पहुंचा था, लेकिन मामूली अंकों से चयन नहीं हो सका। 2020 में यूपी पीसीएस से अपर जिला विकास अधिकारी (समाज कल्याण) बना जौनपुर में तैनात हूं।
सुझाव : बुनियादी पढ़ाई मजबूती से और नियमित करें। सभी पहलुओं की गहराई से जानकारी रखना जरूरी।
भाई और बहन ने साथ पढ़ बनाया श्रेष्ठ स्थान : विवेक कुमार और संध्या, प्रयागराज, 8वीं रैंक और 12वीं रैंक
प्रयागराज के रहने वाले इस परिवार में इस समय खुशियों की बहार है। विवेक ने तीसरे प्रयास में तो संध्या ने पहले प्रयास में सफलता हासिल की। दोनों बहन-भाई डिप्टी कलेक्टर के लिए चुने गए हैं। विवेक ने बताया कि दोनों साथ पढ़ते थे, इससे मदद मिली। हालांकि पिछली असफलताओं से उन्होंने खुद को निराश नहीं होने दिया, बल्कि अपनी कमियों को पहचाना, जिससे तैयारी में मदद मिली। मां प्रतिमा सिंह और कृष्ण कुमार, दोनों स्कूल संचालक।
सुझाव : अपनी तैयारी पर विश्वास रखें, असफलता से निराश न हों।
नियमित पढ़ाई से मिला मुकाम : मल्लिका नैन, देहरादून, 10वीं रैंक
देहरादून से बीकॉम, इकोनॉमिक्स में मास्टर, सीटेट और बीएड करने के साथ ही मैंने पीसीएस करने का भी मन बनाया था। इसके लिए अपनी तैयारी और पढ़ाई को नियमित रखा। पिछले कुछ वर्षों में आए सवालों को आधार बनाकर भी पढ़ाई की थी। इससे पैटर्न समझ आता है।
सुझाव : लगातार अभ्यास करें। कई बार 100 प्रतिशत के बाद भी आप विफल हो सकते हैं, इसलिए धैर्य भी रखें।
120 का चयन औपबंधिक आधार पर
सफल 627 अभ्यर्थियों में 120 का चयन कुछ जरूरी रिकॉर्ड के अभाव में औपबंधिक है। 29 प्रकार के पदों में तीन प्रकार के 55 पदों पर केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन किया गया।
साक्षात्कार के लिए 1,285 अभ्यर्थी बुलाए गए
आयोग ने पीसीएस-2021 की मुख्य परीक्षा का परिणाम 12 जुलाई, 2022 को घोषित किया था। मुख्य परीक्षा में 1285 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया।
वेबसाइट पर जारी होंगे श्रेणीवार कटऑफ
अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति शीघ्र शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद अभ्यर्थियों के प्राप्तांक/पदवार श्रेणीवार कटऑफ अंक आयोग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाएंगे।
-आलोक कुमार, सचिव, यूपीपीएससी
अभ्यर्थियों से उम्मीद, नया यूपी बनाएंगे
यूपीपीसीएस में सफल अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी। उन्होंने कहा, विभिन्न सेवाओं के लिए चयनित अभ्यर्थी समर्पित सेवा भाव के साथ नए उत्तर प्रदेश के निर्माण में सहभागिता सुनिश्चित करेंगे।
-योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री