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UGC: एम सी सुधाकर ने किया यूजीसी नियमन मसौदे का विरोध, कहा- नियम बदलने से पहले राज्य सरकारों से बात करें

Wed, 15 Jan 2025 06:31 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Professor Appointment Rule: कर्नाटक के मंत्री एम सी सुधाकर ने यूजीसी नियमन, 2025 के मसौदे पर अपना विरोध जताया है। उनका कहना है कि ये प्रावधान उच्च शिक्षा प्रणाली और राज्य सरकार की शक्तियों की जड़ पर प्रहार करते हैं।
 
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M C Sudhakar - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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UGC: कर्नाटक के मंत्री एम सी सुधाकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर हाल ही में प्रकाशित यूजीसी नियमन, 2025 के मसौदे पर अपना विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी को किसी भी बदलाव का प्रस्ताव करने से पहले राज्य सरकारों से बातचीत करनी चाहिए।

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा नियमों में मानकों के रखरखाव के उपायों के लिए अपने मसौदे पर सार्वजनिक परामर्श का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा प्रणाली की शक्तियों की जड़ पर प्रहार करता है यह प्रस्ताव: सुधाकर

13 जनवरी को लिखे पत्र में, कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री सुधाकर ने कहा कि राज्य कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित कुछ प्रावधानों का कड़ा विरोध किया जाता है। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान उच्च शिक्षा प्रणाली और राज्य सरकार की शक्तियों की जड़ पर प्रहार करते हैं।

कुलपति चयन प्रक्रिया में राज्यों की भूमिका नहीं: मंत्री

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मसौदा दिशा-निर्देश राज्य सरकार की भूमिका को विश्वविद्यालयों के कुलपति चयन प्रक्रिया से पूरी तरह से अलग रखते हैं। उन्होंने कहा, “दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुलाधिपति या विजिटर द्वारा नियुक्त की जाने वाली खोज-सह-चयन समिति में राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि का प्रावधान नहीं है। कुलाधिपति को समिति द्वारा अनुशंसित पैनल में से कुलपति नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।”

मंत्री ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुलपति नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। यह भी कहा गया कि मसौदे में प्रावधान किया गया है कि यदि नियुक्ति इन दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं होती है, तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाएगा। मंत्री ने इसे राज्य में लागू विश्वविद्यालय कानूनों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इनमें कुलपति के कार्यकाल और पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

उच्च शिक्षा में राज्य सरकार की अहम भूमिका

मंत्री ने जोर दिया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा, “कर्नाटक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी है, जहां सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राज्य सरकार सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के प्रशासन और संचालन के लिए पर्याप्त धन मुहैया कराती है।”

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार न केवल विकास अनुदान प्रदान करती है, बल्कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भी राज्य खजाने से दिए जाते हैं। यह राज्य सरकार की शिक्षा क्षेत्र में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यूजीसी को परामर्श की आवश्यकता

मसौदा दिशा-निर्देशों पर सवाल उठाते हुए, मंत्री ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) को सलाह दी कि वह किसी भी बड़े बदलाव का प्रस्ताव देने से पहले व्यापक स्तर पर राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श करे। उन्होंने कहा, “यूजीसी को छात्रों और विश्वविद्यालयों से संबंधित मौजूदा चुनौतियों और स्थितियों का आकलन करना चाहिए। बिना संवाद के ऐसे बदलाव लागू करना उचित नहीं है।”
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मसौदा दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग

मंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि यूजीसी को इन दिशा-निर्देशों को तुरंत वापस लेने का निर्देश दें और राज्य सरकारों के साथ गहन परामर्श की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल राज्यों की भूमिका को सुनिश्चित करेगा, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समग्र विकास को भी बढ़ावा देगा।
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