याचिका में की गई थी स्वतंत्र जांच की मांग
SG ने याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही यह जानकारी कोर्ट को दी। याचिका में मांग की गई थी कि जब तक पेपर लीक के आरोपों की स्वतंत्र जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक परीक्षा का परिणाम जारी न किया जाए। साथ ही, अगर पेपर लीक होने की पुष्टि होती है तो संबंधित विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता अमन सिंह यादव ने 30 जून को समाजशास्त्र की परीक्षा दी थी। उन्होंने भी जांच पूरी होने तक परिणाम जारी करने पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रश्नपत्र लीक होकर पैसे लेकर बांटा गया था।
NTA को पहले ही दी गई थी शिकायत
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने प्रश्नपत्र में गलतियों और पेपर लीक के आरोपों की जानकारी पहले ही NTA को दे दी थी, लेकिन उसे अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। याचिका में पेपर लीक के आरोपों की CBI या SIT से स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई है। सुनवाई के दौरान CBI की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल प्रेमतोष मिश्रा पेश हुए।
वहीं, NTA ने एक सार्वजनिक सूचना में बताया कि उसे तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में कई गलतियों की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों की जांच के लिए NTA ने एक समिति भी बनाई है। इस मामले के बाद NTA को एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।