स्कूली शिक्षा में पहले ही शुरू हो चुका है बदलाव
स्कूली शिक्षा में यह बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूल स्तर पर पाठ्यक्रमों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। हाल ही में प्रकाशित नई पाठ्यपुस्तकों में विषय-सामग्री को घटाकर छात्रों के कौशल विकास, जीवन-प्रबंधन की क्षमताओं और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया है।
कुलपतियों और प्राचार्यों को भेजा पत्र
यूजीसी ने इस दिशा में एक ठोस कदम उठाते हुए सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि एनईपी-2020 की सिफारिशों के अनुरूप सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों को तुरंत संशोधित किया जाए। इन पाठ्यक्रमों में क्रेडिट फ्रेमवर्क और योग्यता ढांचे को इस तरह तैयार किया जाए कि अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और कौशल विकास को आवश्यक स्थान दिया जा सके।
भविष्य की चुनौतियों के अनुसार नई पीढ़ी को तैयार करना होगा: यूजीसी सचिव
यूजीसी के सचिव मनीष आर. जोशी ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि दुनिया में तकनीक और नवाचार हर क्षण बदल रहे हैं, ऐसे में शिक्षकों और संस्थानों को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें आज की और भविष्य की चुनौतियों के अनुसार नई पीढ़ी को तैयार करना होगा।