दो साल में रैगिंग से गई 51 छात्रों की जान
देशभर के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में रैगिंग के चलते 2022 से 24 के दौरान 51 छात्रों की जान चली गई। यह आंकड़ा कोटा के कोचिंग संस्थानों के 57 विद्यार्थियों की खुदकुशी के करीब है। सोसाइटी अगेंस्ट वायलेंस इन एजुकेशन (सेव) की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
मेडिकल कॉलेज रैगिंग के सबसे बड़े केंद्र हैं, 38.6 फीसदी शिकायतें यहीं से आती हैं। 35.4% गंभीर मामले और 45.1% मौतें मेडिकल कॉलेजों से है। हैरानी की बात यह है कि देश में मेडिकल छात्र महज 1.1 फीसदी है।
तीन वर्षों में राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी हेल्पलाइन पर सिर्फ 3,156 शिकायतें दर्ज की गईं, जो पूरी तस्वीर नहीं है। काफी शिकायतें सीधे कॉलेजों या गंभीर मामलों में पुलिस में दर्ज होती हैं। ज्यादातर पीड़ित सुरक्षा के डर से चुप रहते हैं या शिकायत दर्ज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।