यूजीसी विनियम, 2012
यूजीसी ने वर्ष 2012 में ये विनियम इसलिए बनाए थे ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को जाति, धर्म, भाषा, लिंग, क्षेत्र और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव से सुरक्षा दी जा सके। इन नियमों का मुख्य फोकस छात्रों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर था। खास तौर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के संरक्षण को इसमें प्रमुख स्थान दिया गया।
2012 के नियमों में भेदभाव की स्पष्ट पहचान
2012 के विनियमों में भेदभाव को बहुत व्यावहारिक और ठोस उदाहरणों के साथ परिभाषित किया गया था। इसमें प्रवेश प्रक्रिया से लेकर कक्षा, परीक्षा, मूल्यांकन, छात्रवृत्ति और कैंपस सुविधाओं तक के मामलों को शामिल किया गया। यह सब भेदभाव की श्रेणी में माने गए:
- कक्षा में जाति का उल्लेख करना
- छात्रों को रिजर्व कैटेगरी कहकर चिन्हित करना
- लैब या लाइब्रेरी में अलग व्यवहार करना
2012 में शिकायत और कार्रवाई की व्यवस्था
2012 के नियमों के तहत हर संस्थान में ईक्वल ऑपर्च्यूनिटी सेल (Equal Opportunity Cell) और एक एंटी डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर (Anti-Discrimination Officer) की नियुक्ति अनिवार्य की गई थी। छात्र या अभिभावक लिखित शिकायत कर सकते थे। शिकायत पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संस्थान की थी और अपील का अधिकार संस्थान प्रमुख के पास होता था।
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यूजीसी विनियम, 2026
आसान भाषा में कहें तो पुराने नियम भेदभाव की घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थे, इसलिए नए नियम लाए गए। नए नियमों में सतही तौर पर कई मूलभूत विचार वही रहते हैं, लेकिन अब इसका दायरा व्यापक कर दिया गया है। कैंपस में पहले से ज्यादा कमजोर या संवेदनशील वर्गों को शामिल किया गया है और नियमों को लागू करने के तरीके भी अब सख्त और समय-सीमित (टाइम-बाउंड) हो गए हैं।
सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है दायरा
2026 में अधिसूचित नए विनियमों में यूजीसी ने समानता की अवधारणा को केवल छात्रों तक सीमित न रखकर पूरे संस्थान तक विस्तारित किया। इन नियमों में पहली बार 'हितधारक' शब्द का प्रयोग किया गया, जिसमें छात्र, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, प्रबंधन और संस्थान प्रमुख सभी को शामिल किया गया।
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2026 में भेदभाव की व्यापक परिभाषा
2026 के विनियमों में भेदभाव को केवल प्रत्यक्ष व्यवहार तक सीमित नहीं रखा गया। इसमें स्पष्ट (Explicit) और अंतर्निहित (Implicit) दोनों तरह के भेदभाव को शामिल किया गया।
इसके साथ ही, भेदभाव के दायरे में अनुसूचित जाति-जनजाति के अलावा सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांगजन को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया।
नई संस्थागत संरचना में बदलाव
2026 के विनियमों में संस्थानों के भीतर कई नई व्यवस्थाएं अनिवार्य की गईं। इनमें समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre), उसके अंतर्गत समता समिति (Equity Committee), कैंपस निगरानी के लिए समता समूह (Equity Squads), और हर इकाई में समता दूत (Equity Ambassador) शामिल हैं।
इसके अलावा, 24×7 समता हेल्पलाइन (Equity Helpline), ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और हर छह महीने में सार्वजनिक रिपोर्ट का प्रावधान भी जोड़ा गया।
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शिकायत प्रक्रिया में समयबद्धता पर जोर
नए इक्विटी नियमों कि जरूरत क्यों पड़ी?
यूजीसी के अनुसार, 2012 के इक्विटी विनियम मुख्य रूप से छात्रों के साथ होने वाले प्रत्यक्ष भेदभाव पर केंद्रित थे। समय के साथ यह सामने आया कि समानता से जुड़े कई मुद्दे केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं, बल्कि संस्थागत नीतियों, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक ढाँचों से भी जुड़े हो सकते हैं।
इसी पृष्ठभूमि में यूजीसी ने 2026 के विनियमों के जरिए समानता के दायरे को छात्रों से आगे बढ़ाकर पूरे संस्थान तक विस्तारित करने और एक अधिक संरचित व निगरानी-आधारित ढाँचा बनाने की आवश्यकता बताई।
दोनों नियमों के बीच मुख्य अंतर
2012 और 2026 के नियमों के बीच सबसे बड़ा अंतर दायरे और संरचना को लेकर है। जहां 2012 के नियम व्यवहार आधारित और छात्र-केंद्रित थे, वहीं 2026 के नियम संस्थागत ढांचे और निगरानी तंत्र पर ज्यादा निर्भर हैं। दोनों नियमों के बीच मुख्य अंतर 10 प्वाइंट्स में समझें:
1. नियमों का मूल फोकस
- 2012 विनियम मुख्य रूप से छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव पर केंद्रित थे।
- 2026 विनियम छात्रों के साथ-साथ शिक्षक, कर्मचारी और प्रबंधन को भी दायरे में लाते हैं।
2. समानता की परिभाषा
- 2012 में समानता को छात्र-व्यवहार और सुविधाओं से जोड़कर देखा गया।
- 2026 में समानता को संस्थान की नीतियों, प्रक्रियाओं और ढांचे से जोड़कर परिभाषित किया गया।
3. भेदभाव की प्रकृति
- 2012 में भेदभाव को ज़्यादातर प्रत्यक्ष और दिखाई देने वाले व्यवहार के रूप में देखा गया।
- 2026 में भेदभाव को प्रत्यक्ष (Explicit) और अप्रत्यक्ष/अंतर्निहित (Implicit)—दोनों रूपों में माना गया।
4. संरक्षित वर्गों का दायरा
- 2012 में मुख्य ज़ोर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों पर था।
- 2026 में एससी/एसटी के साथ-साथ ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांगजनों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया।
5. संस्थागत ढांचा
- 2012 में हर संस्थान में केवल Equal Opportunity Cell और Anti-Discrimination Officer का प्रावधान था।
- 2026 में समान अवसर केंद्र, समता समिति, समता दल और समता दूत जैसी नई संरचनाएं जोड़ी गईं।
6. निगरानी और रिपोर्टिंग
- 2012 में निगरानी मुख्य रूप से आंतरिक और सीमित थी।
- 2026 में नियमित निगरानी, सार्वजनिक रिपोर्ट और कैंपस-स्तरीय मॉनिटरिंग का प्रावधान किया गया।
7. शिकायत कौन कर सकता है
- 2012 में शिकायत करने का अधिकार छात्र या उनके अभिभावकों तक सीमित था।
- 2026 में कोई भी हितधारक शिकायत दर्ज कर सकता है।
8. शिकायत प्रक्रिया
- 2012 में शिकायत प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और संस्थान-केंद्रित थी।
- 2026 में ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन और समयबद्ध प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया।
9. अपील का अधिकार
- 2012 में अपील संस्थान प्रमुख के पास की जाती थी।
- 2026 में अपील के लिए लोकपाल (Ombudsperson) की व्यवस्था की गई।
10. नियमों की प्रकृति
- 2012 के विनियम व्यवहार-आधारित और अपेक्षाकृत संक्षिप्त थे।
- 2026 के विनियम संरचनात्मक, विस्तृत और बहु-स्तरीय हैं।