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कॉलेजों के लिए जरूरी होगा नैक एक्रिडिटेशन, जानें क्या बदलेगा

Thu, 25 Jul 2019 03:19 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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यूजीसी
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2022 तक देश के सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन व प्रत्यायन परिषद (नैक) एक्रिडिटेशन लेना अनिवार्य किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नैक एक्रिडिटेशन का दर्जा देने का लक्ष्य रखा है। इसी के तहत यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि वे नैक एक्रिडिटेशन लेने के लिए रिसर्च, विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों के पदों को भरने समेत शिक्षा गुणवत्ता पर खास फोकस करें। 

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खास बात यह है कि बड़े विश्वविद्यालय इस प्रक्रिया में छोटे विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के लिए मेंटर की भूमिका निभाएंगे। वे छोटे विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को नैक एक्रिडिटेशन लेने में मदद करेंगे। इसके बदले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) उन्हें 30 लाख रुपये तक की मदद भी करेगा।
 

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कैसे चुने जाएंगे बड़े विश्वविद्यालय

यूजीसी ने बुधवार को इस संबंध में विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें नैक एक्रिडिटेशन के नियमों व शर्तों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत सभी संस्थानों को 2022 तक कम से कम 2.5 प्राप्तांकों के साथ नैक एक्रिडिटेशन लेना अनिवार्य है। बड़े विश्वविद्यालयों को मेंटर बनना होगा। मेंटर बनने के लिए नैक एक्रिडिटेशन में 3.26 या उससे अधिक अंक होने जरूरी हैं। मेंटर बनने के लिए दोनों संस्थानों के बीच समझौता होगा। 

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अभी क्या है स्थिति
सूत्रों के मुताबिक, देशभर में फिलहाल 350 विश्वविद्यालयों और 30 हजार कॉलेजों में नैक एक्रिडिटेशन नहीं है। इन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने नैक एक्रिडिटेशन के लिए आवेदन भी नहीं किया है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत सभी संस्थानों को रैकिंग में शामिल होने के लिए नैक एक्रिडिटेशन अनिवार्य है।

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