राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को गुणवत्ता, कौशल विकास, बहुविषयक पढ़ाई और शोध पर विशेष काम करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) ने मंगलवार को आयोजित बैठक के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित संस्थागत विकास योजना तैयार करने के दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसमें विश्वस्तरीय गुणवत्ता और मानकों के आधार पर अपने बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के साथ अगले 25 सालों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक विकास के नए लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण संस्थानों को गुणवत्ता, कौशल विकास के साथ बहुविषयक पढ़ाई और शोध पर विशेष काम करना होगा। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देशों के तहत अपने विकास का खाका खुद तैयार करना होगा। इसमें पढ़ाई के अलावा शिक्षकों की भर्ती, शिक्षकों की पदोन्नति, कैंपस ऑडिट और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की योजना भी शामिल है। इस नई पहल के जरिए भारत के विश्वविद्यालय अपने लक्ष्य और विकास की रूपरेखा तय कर सकेंगे। ड्रॉफ्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपने शिक्षण संस्थानों को बेहतर बनाने के लिए रिपोर्ट तैयार करके यूजीसी को देंगे। ईडीपी के माध्यम से छात्रों की संख्या के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए मानक तय किए हैं।
इसके माध्यम से छात्रों के अनुपात में ही विश्वविद्यालय की ढांचागत सुविधाएं व आवश्यकताएं तय की जाएंगी। अर्थात छात्रों की संख्या के आधार पर विश्वविद्यालयों या ऐसे अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों का कुल क्षेत्रफल, कक्षाओं की संख्या और कक्षाओं का क्षेत्रफल, छात्र अध्यापक अनुपात, छात्रों के लिए हॉस्टल, लाइब्रेरी, लैबोरेट्री आदि के मानक बनाने होंगे। अपने विकास का आकलन और भविष्य की रूपरेखा तय करते समय विश्वविद्यालयों को वैश्विक मानदंडों का ध्यान रखना होगा। ऐसा करने से भारत के विश्वविद्यालय न केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में खुद को स्थापित कर पाएंगे बल्कि यहां छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर भी मिलेंगे।