क्या रही प्रतिबंध की वजह?
यूजीसी सचिव मनीष जोशी ने कहा, "यूजीसी की एक स्थायी समिति ने पाया है कि विश्वविद्यालयों ने यूजीसी के पीएचडी विनियमों और पीएचडी डिग्री प्रदान करने के लिए शैक्षणिक मानदंडों के प्रावधानों का पालन नहीं किया है। विश्वविद्यालयों को डिग्री की अखंडता से समझौता करते हुए पाया गया और उन्हें अगले पांच साल तक नए पीएचडी छात्रों को दाखिला देने से रोक दिया गया है।"
उन्होंने कहा, "संभावित छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे इन विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश न लें क्योंकि उनकी डिग्री को उच्च शिक्षा और रोजगार के उद्देश्य से मान्यता प्राप्त या वैध नहीं माना जाएगा।"
यूजीसी अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा, "विश्वविद्यालयों को पीएचडी कार्यक्रमों में उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। यूजीसी उन संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा जो यूजीसी के पीएचडी नियमों का पालन करने में विफल रहते हैं।"
जगदीश कुमार ने आगे कहा, "हम कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में पीएचडी कार्यक्रमों की गुणवत्ता की जांच करने की प्रक्रिया में भी हैं। यदि वे पीएचडी नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे गलत संस्थानों को चिन्हित करना और उन्हें पीएचडी छात्रों को प्रवेश देने से रोकना आवश्यक है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय उच्च शिक्षा की अखंडता और वैश्विक प्रतिष्ठा से कोई समझौता न हो।"