विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के कालेजों, विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के बारे में शिक्षकों, छात्रों, अधिकारियों एवं उच्च शिक्षा प्रणाली के अन्य पक्षकारों के बीच जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया है। विश्वविद्यालयों और कालेजों से इस विषय पर विभिन्न गतिविधियों को विश्वविद्यालय गतिविधि निगरानी पोर्टल पर साझा करने को कहा गया है। इस पोर्टल की देखरेख आयोग करता है।
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यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कुलपतियों को लिखे पत्र में कहा, ‘ नई शिक्षा नीति के बारे में शिक्षकों, छात्रों, अधिकारियों एवं उच्च शिक्षा प्रणाली के अन्य पक्षकारों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इस संबंध में आपसे नीति के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रभावों पर केंद्रित वेबिनार और अन्य आनलाइन गतिविधियां आयोजित करने का आग्रह किया जाता है ।’ गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। नई शिक्षा नीति ने 34 वर्ष पुरानी शिक्षा नीति का स्थान लिया है जिसे 1986 में लागू किया गया था ।
नई नीति का लक्ष्य भारत के स्कूलों और उच्च शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सुधार करना है कि देश दुनिया में ज्ञान की ‘सुपरपॉवर’ कहलाए। शिक्षा नीति के तहत पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी। वहीं, बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को इसमें कुछ कम किया गया है। नई शिक्षा नीति में विधि और मेडिकल कॉलेजों के अलावा अन्य सभी विषयों की उच्च शिक्षा के एक एकल नियामक का प्रावधान है। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए समान प्रवेश परीक्षा की बात कही गई है। पुरानी नीति के 10+2 के ढांचे में बदलाव करते हुए नई नीति में 5+3+3+4 का ढांचा लागू किया गया है। इसके लिए आयु सीमा क्रमश: 3-8 साल, 8-11 साल, 11-14 साल और 14-18 साल तय की गई है।