आईआईटी, आईआईएम, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अब एलुमनी कनेक्ट सेल बनाए जाएंगे। देशी और विदेशी छात्रों का डाटा भी एकत्रित किया जाएगा। इसका मकसद पूर्व छात्रों के अनुभवों का संस्थान के वर्तमान छात्रों को लाभ और कैंपस प्लेसमेंट में मदद लेना है। पूर्व छात्र वीडियो कांफ्रेंस, सेमिनार या अन्य कार्यक्रमों आदि के माध्यम से संस्थान के छात्रों से रूबरू होंगे। वहीं,पाठ्यक्रम बनाने से लेकर संस्थान के विकास में भी सहयोग करेंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की योजना बनाई है। इसी के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर बाकायदा दिशा-निर्देश भी तैयार किए हैं।
दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व छात्र किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान के लिए एक मजबूत स्तंभ होते हैं। एक सक्रिय पूर्व छात्र संघ शैक्षणिक मामलों, छात्रों के समर्थन के साथ-साथ वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों तरह के संसाधनों को जुटाने में भी योगदान दे सकता है।
पूर्व छात्रों के साथ जुड़ने से संस्थान भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की ताकत दिखाने के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूर्व छात्रों की सेवाओं का उपयोग कर सकेगा। इसके अलावा विदेशी मूल के पूर्व छात्रों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय पूर्व छात्र भी ब्रांड एंबसेडर के रूप में प्रचार करेंगे। इसलिए शिक्षण संस्थानों को पूर्व छात्रों से जोड़ने की जरूरत है। ब्रांड निर्माण के लिए उपयुक्त माध्यम तैयार करके, उनके योगदान को उचित मान्यता भी देनी होगी।
पाठ्यक्रम, प्लेसमेंट, ट्रेनिंग इंटर्नशिप में भी सहयोग
पूर्व छात्रों का पाठ्यक्रम, प्लेसमेंट ट्रेनिंग, इंटर्नशिप आदि में भी सहयोग लिया जा सकता है। कुछ पूर्व छात्र उद्योगों से जुड़े होंगे। वे नए छात्रों को अपने यहां नौकरी से पहले इंटर्नशिप और प्लेसमेंट में सहयोग कर सकते हैं। इसके अलावा मार्केट डिमांड के आधार पर वे पाठ्यक्रम आदि में नए विषयों को भी जोड़ने पर अपना योगदान दे पाएंगे।
डाटा एकत्रित करने से पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी
पूर्व छात्रों का डाटा एकत्रित करने का मकसद, पूर्व छात्रों का नाम, पढ़ाई व वर्ष, पूर्व और वर्तमान पता, नौकरी, व्यवसाय आदि की जानकारी जुटाना है। इसके माध्यम से उनके व्यवसाय और नौकरी से अलग-अलग ग्रुप बनाकर अलग-अलग छात्रों के वर्ग को जोड़ा जा सकता है। मसलन, साइंस, कला व कॉमर्स के छात्रों से है। इससे उनकी पसंद और काम के आधार पर नए छात्रों को जोड़ने में मदद मिलेगी। सभी पूर्व छात्रों को उनके पूर्व संस्थान से जोड़ने के लिए एक ग्रुप मैसेज और ईमेल से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सभी जानकारियां भेजी जा सकें।
सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों से भी जोड़ें
पूर्व छात्रों को सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाए। इसमें संस्थान के आसपास के इलाकों, गांवों आदि में लोगों के लिए विभिन्न सामुदायिक सेवा कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। इसमें नए छात्रों के साथ पूर्व छात्रों को जोड़ना चाहिए। वे आर्थिक रूप से इन कार्यक्रमों में सहयोग देकर शिक्षा, हेल्थ, कृषि, महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजना से जुड़ सकते हैं।