ई-बुक्स (E-Books) यानी वो किताबें जो इंटरनेट पर सॉफ्ट कॉपी के फॉर्मेट में उपलब्ध हों। जिन्हें आप डेस्कटॉप, मोबाइल या टैबलेट जैसे किसी गैजेट पर पढ़ सकते हैं। पिछले एक दशक में लोगों के बीच ई-बुक की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। लेकिन अब यूरोप ने ई-बुक्स की रीसेल को अवैध घोषित कर दिया है। पिछले करीब दो सालों की बात करें, तो ई-बुक का वैश्विक बाजार (Global Market) में भी घटने लगा है।
हाल में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन पब्लिशर्स की एक रिपोर्ट आई। इसमें कहा गया है कि ई-बुक पढ़ने वाले लोगों की संख्या करीब 7 फीसदी बढ़कर जहां 16 से 23 फीसदी पहुंच गई थी, वहीं इस साल (2019) के शुरुआती महीने में ही इसमें 5 फीसदी की कमी आ गई। लेकिन भारत के ई-बुक बाजार के साथ ऐसा नहीं है। यहां तो ई-बुक्स का बाजार करीब 30 फीसदी की दर से बढ़ा है।
डिवाइस कंपनी किंडल ई-बुक के क्षेत्र में काफी काम कर रही है। इसके अनुसार, भारत और चीन में ई-बुक पढ़ने वालों की संख्या 200 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में भारत में ई-बुक का बाजार देश के कुल पुस्तक बाजार का 25 फीसदी है।
तेजी से क्यों बढ़ रहा है ये बाजार