लाइफ साइंसेज नीति तैयार की जा रही
मंत्री के मुताबिक, तेलंगाना एक नई लाइफ साइंसेज नीति पर काम कर रहा है जिससे रिसर्च, इनोवेशन और ग्लोबल पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि तेलंगाना देश की जीडीपी में 5% से ज्यादा योगदान देता है। 2024–25 में राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 8.2% रही, जो देश के औसत 7.6% से ज्यादा है।
पिछले 20 महीनों में तेलंगाना में 3.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिसमें से 63,000 करोड़ सिर्फ लाइफ साइंसेज सेक्टर से हैं। अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच इस सेक्टर से 26,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का एक्सपोर्ट हुआ।
युवाओं को तैयार करने के लिए बनाए जा रहा संस्थान
मंत्री ने बताया कि 2030 तक तेलंगाना का लक्ष्य लाइफ साइंसेज इकॉनमी को 80 अरब डॉलर से बढ़ाकर 250 अरब डॉलर करना है। सरकार बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हेल्थकेयर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों के लिए “बायो-डिजिटल वर्कफोर्स” तैयार कर रही है। इसके लिए लाइफ साइंसेज यूनिवर्सिटी और यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसी संस्थान बनाए जा रहे हैं ताकि युवा नई तकनीकों में ट्रेनिंग पा सकें।
राज्य सरकार वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम और कई ग्लोबल संस्थानों के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट और इनोवेशन को नई दिशा दे रही है। श्रीधर बाबू ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भी आमंत्रित किया कि वे तेलंगाना में सेल और जीन थेरेपी, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, mRNA वैक्सीन, रिसर्च और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में निवेश करें।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना एआई-आधारित दवा खोज, जीनोमिक्स, ग्रीन बायोमैन्युफैक्चरिंग, कृषि-बायोटेक और पशु स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।