योजना से जुड़ी मुख्य बातें
- योजना के विस्तार से कक्षा 6 से 8 के करीब 15.14 लाख छात्र लाभान्वित होंगे।
- इसके बाद योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 35 लाख हो जाएगी।
- सरकार ने योजना के विस्तार के लिए 343.55 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च को मंजूरी दी है।
- चालू वित्त वर्ष में इस विस्तार को लागू करने के लिए 217.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- यह योजना वर्तमान में राज्य के 37,447 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में संचालित की जा रही है।
- छात्रों को सप्ताह के दिनों में उपमा, खिचड़ी, पोंगल जैसे पौष्टिक नाश्ते दिए जाते हैं।
- शुक्रवार को विशेष रूप से 'रवा केसरी' परोसी जाती है।
- नाश्ते में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाज (मिलेट) का भी उपयोग किया जाता है।
- एक भोजन से बच्चों को लगभग 293 कैलोरी ऊर्जा और 9.85 ग्राम प्रोटीन मिलता है।
- इसके अलावा नाश्ते में आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व भी शामिल होते हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में मदद करते हैं।
तमिलनाडु सरकार ने दिवंगत मुख्यमंत्री के सम्मान में, पिछली DMK सरकार की 'मुख्यमंत्री नाश्ता योजना' का नाम बदलकर 'पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना' कर दिया है। इसका नाम दिवंगत कांग्रेस नेता के. कामराज के नाम पर रखा गया है।
कामराज को राज्य के शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने गरीबी से निपटने और स्कूलों में बच्चों के दाखिले को बढ़ावा देने के लिए 1956 में स्कूलों में 'मिड-डे मील' (दोपहर के भोजन) की योजना शुरू की थी। बाद में, 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन ने इस योजना को 'पुराची थलैवर MGR पौष्टिक भोजन योजना' में बदल दिया था।