बढ़ी फीस ने देने पर छात्रों को दंडित करने का भी आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका ने लगभग 30 छात्रों को बढ़ी हुई फीस न देने के कारण दंडित किया और उन्हें अपनी कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। बताया गया कि इन छात्रों को लाइब्रेरी में बैठने के लिए मजबूर किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, “आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?” और निर्देश दिया कि सभी छात्रों को अपनी कक्षाओं में बैठने दिया जाए।
अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद
स्कूल की ओर से पेश हुए एक वरिष्ठ वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसी स्थिति अब दोबारा नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की थी, जहां बकाया फीस विवाद को लेकर कुछ छात्रों को स्कूल में प्रवेश से रोकने के लिए कथित तौर पर “बाउंसरों” की मदद ली गई थी।