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Delhi: 'आप ऐसा कैसे कर सकते हैं...', बिना मंजूरी फीस बढ़ोतरी के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, मांगा जवाब

Fri, 10 Oct 2025 08:29 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और निजी स्कूलों से बिना शिक्षा निदेशालय की मंजूरी के 100% फीस बढ़ोतरी के आरोप पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने डीपीएस द्वारका को फीस विवाद में छात्रों को कक्षा से बाहर बैठाने पर फटकार लगाई और सभी को कक्षा में बैठाने का निर्देश दिया।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार और राजधानी के निजी स्कूलों के संगठन से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बिना शिक्षा निदेशालय (DoE) की मंजूरी के 100 फीसदी फीस बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया है।

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याचिकाकर्ता नई समाज पैरेंट्स एसोसिएशन की ओर से दलील दी गई कि कई निजी स्कूलों को दिल्ली सरकार से रियायती दरों पर जमीन दी गई थी, इस शर्त पर कि किसी भी प्रकार की फीस बढ़ोतरी के लिए शिक्षा निदेशालय की अनुमति आवश्यक होगी।

मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने जब याचिकाकर्ता की दलीलें सुनीं, तो उन्होंने स्कूलों के पक्ष के वकील से पूछा- “आप इस शर्त को कैसे दरकिनार कर सकते हैं?”
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इसके बाद पीठ ने दिल्ली सरकार और Action Committee of Unaided Recognised Private Schools को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

बढ़ी फीस ने देने पर छात्रों को दंडित करने का भी आरोप

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका ने लगभग 30 छात्रों को बढ़ी हुई फीस न देने के कारण दंडित किया और उन्हें अपनी कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। बताया गया कि इन छात्रों को लाइब्रेरी में बैठने के लिए मजबूर किया गया।

मुख्य न्यायाधीश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, “आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?” और निर्देश दिया कि सभी छात्रों को अपनी कक्षाओं में बैठने दिया जाए।
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अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद

स्कूल की ओर से पेश हुए एक वरिष्ठ वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसी स्थिति अब दोबारा नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की थी, जहां बकाया फीस विवाद को लेकर कुछ छात्रों को स्कूल में प्रवेश से रोकने के लिए कथित तौर पर “बाउंसरों” की मदद ली गई थी।
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