केंद्र सरकार ने अदालत में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार अपने उस रुख पर कायम है कि नीट प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर आगे नहीं बढ़ाई जाएंगी। हालांकि, जिन लोगों का संबंध गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक मामलों से है, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी।
कितने लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं होगी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जिन लोगों का संबंध गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक मामलों से है, ऐसे 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं लेने का फैसला किया गया है।
सुनवाई के दौरान और क्या दलीलें दी गईं?
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान वकीलों के बच्चों तक के साथ मारपीट की गई। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में लगभग 300 वीडियो सौंपे गए हैं।
उन्होंने मांग की कि दिल्ली पुलिस आयुक्त और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के निदेशक से पूछा जाए कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और पैलेट गन जैसे उपायों का इस्तेमाल क्यों किया। उनका यह भी कहना था कि कई ऐसे लोगों की पहचान की गई है जो वर्दी में नहीं थे, लेकिन पुलिस कार्रवाई में शामिल दिखाई दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है। इसी दिन मामले में आगे की सुनवाई होगी।
पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की ज्यादती या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी दोहराया था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से संवैधानिक रूप से संरक्षित है।
20 जुलाई के प्रदर्शन में हुई थी झड़प
20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित सीजेपी (CJP) के नेतृत्व वाले मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे।