मंगनाराम ने दोनों बेटों को पैसे उधार लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम्स की तैयारी कराने पिछले साल कोटा भेजा। दोनों ने कड़ी मेहनत की और सफल हुए। महेन्द्र गांव का पहला स्टूडेंट होगा जो डॉक्टर बनेगा। वहीं, श्याम सुंदर भी गांव का पहला स्टूडेंट होगा जो IIT से इंजीनियरिंग करेगा। महेन्द्र ने नीट में 545 मार्क्स लाकर ऑल इंडिया में 8592वीं रैंक व कैटेगरी में 5541वीं रैंक हासिल किया है। वहीं, श्याम सुंदर ने JEE(A) में 15949वीं रैंक हासिल किया है।
मंगनाराम ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा सुरेन्द्र जोधपुर से बीएड कर रहा है। वह खुद दसवीं और पत्नी चंद्रादेवी चौथी पास हैं। उन्होंने बताया कि, 'हमारे पास जमीन तो है, लेकिन सूखा क्षेत्र होने से बंजर है। परिवार चलाने के लिए 12 हजार रुपए प्रतिमाह की पगार पर ट्रक चलाता हूं। फीस के लिए कर्ज लेकर दो बेटों को कोटा पढ़ने भेजा।' पिता के मुताबिक, 'दोनों ने मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए अपनी रूचि के बारे में 12वीं में ही बता दिया था। मैं ज्यादा पैसा कमाने के लिए लंबे और कठिन रूट के काम लेने लगा। लेकिन फिर भी कोटा में रहने और कोचिंग के खर्च में कमी ही थी। इसलिए मैंने कई लोगों से कर्ज लिया, कुछ ज्वेलरी बेची और पैसों की व्यवस्था की।' उन्होंने कहा कि अगर इस बार वे क्वालीफाई नहीं करते, तो शायद उनकी अगले साल की पढ़ाई नहीं करवा सकता था।