छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक छोटे से गांव में रहने वाले ये किसान 30 नेत्रहीन बच्चों के जीवन में रोशनी भर रहे हैं। बरुन कुमार प्रधान अमलीडीह गांव में नेत्रहीन बाल विद्यामंदिर नाम का एक स्कूल चलाते हैं जिसमें नेत्रहीन गरीब बच्चों को पढ़ाया जाता है।
उन्होंने ये स्कूल 2014 में शुरु किया था और तब से अब तक उनके स्कूल में लगभग उस समय ये दोगुने छात्र पढ़ने आते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इस स्कूल में पढ़ाने वाले 5 शिक्षक भी शारीरिक रुप से अक्षम हैं।
इस स्कूल को सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। बस कुछ बुद्धिजीवी लोग स्कूल चलाने में उनकी आर्थिक मदद करते हैं।
ये स्कूल छठवीं कक्षा तक है जो पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्टस् के लिए भी बच्चों को प्रेरित करता है। साथ ही ये गरीब बच्चों को मुफ्त में रहने के लिए छत भी देता है।