शहीदों को याद करने वाले तो बहुत होते है पर उनके परिवार वालों को याद करने वाले लोग बहुत ही कम होते है।
देश का एक बेटा ऐसा भी है जो सीमा पर शहीद होने वोले जवानों के परिवार वालों को याद करता है और जवानों के परिवार वालों को सांत्वना पत्र लिखता है।
अपने इन पत्रों में देश का यह बेटा शहीदों के सम्मान में पत्र लिख कर यह उनके परिवार वालों का हिम्मत बधाता है। यह ये काम वह अपने खर्च पर पिछले 17 सालों से कर रहे है और अब तक यह करीब तीन हजार पत्र लिख चुके है।
सुरत में एक प्राइवेट फर्म में सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे 37 वर्षीय जितेंदर खुद भी अर्मी से सेवा निवृत है।
जितेंदर का कहना है कि मैं कारगील की लड़ाई के समय से ही सीमा पर शहीद हुए जवानों के परिवार वालों को फत्र लिख रहा हूं और मैं अपने इस काम को अपना कर्तव्य मानता हूं।
जितेंदर ने बताय की मैं पूरी शिद्दत के साथ शहीदों के परिवार वालों को पत्र लिखते है।
जितेंदर
क्योंकि हमारे जावन सीमा की कठिन परिस्थितियों में हर मौसम में हर वक्त देश की सेवा करते रहते हैं वो देश का ख्याल रखते है तो हमें भी जवान और सीमा पर शहीदों के परिवार वालों का ध्यान रखना चाहिए।
शहीदों के और उनके परिवार वालों का ख्याल रखने की यह मेरी छोटी सी कोशिश है। जितेंदर ने बताय की मैं पूरी शिद्दत के साथ शहीदों के परिवार वालों को पत्र लिखते है।
जितेंदर ने कहा कि अपने पत्रों के जरिए वो शहीदों के परिवार वालों को अपने के सम्मान में पत्र लिखकर उन्हें एहसास दिलाते है कि वो बहुत भाग्यशाली है। जो उन्होंने इतने महान बेटे को जन्म दिया।
जितेंदर
जितेंदर ने कहते है कि जवानों के परिवार वालों को पत्र लिखने के लिए वह अलग-अलग लोकल अखबारों और सेना के रिकार्ड दस्तावेजों से शहीद जवानों के आवास पते निकाल लेते है।
जितेंदर ने बताया कि इस बार उन्होंने साल 2003 में जम्मू कश्मीर में हुई आतंकी मुठभेड़ में राजस्थान के जिला भरतपुर के गांव कुखेड़ा में रहने वाले शहीद हरदीप सिंह के पिता को पत्र लिख कर सम्मान व्यक्त किया है।
जितेंदर का कहना है की वो अपने जीवन के बाकी बचें दिनों में लगातर प्रत्येक शहीद जवान के परिवार वालों के पत्र लिखते रहेगें उन्ंहोने कहा की उनकी इच्छा है कि वो अपने जीवन में एक-एक दिन सभी शहीद जवानों के घर जा कर उनके माता-पिता की सेवा करना और चाहते हैं।