मैंने आसपास के टूटे ईंट के अवशेष, बजरी और पत्थर इकट्ठा करना शुरू कर दिया। मुझे जहां कहीं भी गड्ढा दिखता, मैं उसे भरने का प्रयास शुरू कर देता। कभी-कभार ऐसा भी होता है कि किसी सड़क पर लगातार वाहन दौड़ रहे हैं और उस पर गड्ढे भी होते हैं, तो उस स्थिति मैं पूरे धैर्य के साथ यातायत कम होने का इंतजार करता हूं। वैसे भी मेरे पास कोई सरकारी सूचक बोर्ड तो है नहीं, जिसका प्रयोग करके मैं यातायात रोककर अपना काम करूं।
सरकारी स्कूल के कक्षा छह में पढ़ने वाले मेरे जैसे बच्चे के इस काम की खबर किसी तरह स्थानीय निकाय प्रशासन के कानों तक पहुंची, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। शहर में चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य की वजह से भी कई सड़कों का हाल बुरा था, लेकिन अच्छी बात यह रही कि मेरे काम का पता चलने पर मेट्रो अधिकारियों की भी नींद खुली और उन्होंने कई सड़कों के गड्ढे भरवाने का काम किया।
एक साल होने को है उस घटना को, लेकिन मैं आज भी बिना समय या प्रदूषण की परवाह किए, जहां भी कोई गड्ढा दिखता है, उसे भरने का प्रयास करता हूं। मैंने अपने काम के लिए अपने दोस्तों की भी मदद ली है। मैं चाहता हूं कि किसी का जीवन खराब सड़कों के कारण खत्म न हो।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।