मेरे घर के ठीक सामने महिंद्रा का शोरूम था, मैंने एक दिन विचार किया कि क्यों न एक छोटा ट्रक ले लूं, और उसे ही फूड ट्रक में बदलकर खुद का खाने का व्यापार शुरू करूं। चूंकि पुराना वाहन फाइनेंस पर नहीं निकलता, इसलिए मैंने नया ट्रक लेने के बारे में सोचा जो फाइनेंस पर मिल सकता था। इसलिए मैंने कुछ रुपये सरकार की, 'महिला रोजगार उद्योग योजना' के अंतर्गत लोन लिया और अपने पास बचे हुए सोने के गहने बेच कर रकम जुटाई।
मुझे यह बिल्कुल नहीं पता था कि फूड ट्रक चलेगा या नहीं, लेकिन मैंने बस हिम्मत न हारते हुए उसी पर खाना बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे लोग यहां आने लगे। शुरुआत में तो इससे मुझे पांच-छह सौ रुपये की बचत होती थी, पर जबसे आनंद महिंद्रा ने मेरे लिए ट्वीट किया, तबसे मेरे फूड ट्रक पर ग्राहकों में वृद्धि हुई है, लोग मदद के लिए भी आगे आ रहे हैं। ज्यादातर ग्राहक दक्षिण कन्नड़ के ही होते हैं, जिनमें डॉक्टर, छात्र और नौकरीपेशा लोग घर का खाना खाने आते हैं।
कुछ छात्रों ने मेरे फूड ट्रक को गूगल मैप्स पर डाल दिया है, जिससे इसे खोजने में आसानी रहती है। मेरा भाई सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था, मुझे फूड ट्रक पर एक आदमी की जरूरत थी, तो उसने अपनी नौकरी छोड़ दी है और अब मेरी मदद करता है। मुझे मेरी जिंदगी में उम्मीदें मिली हैं। यहां से होने वाली आमदनी से मैं अपना परिवार चला रही हूं। मैं सभी महिलाओं को यह बताना चाहती हूं कि जिंदगी उतार-चढ़ाव का नाम है।
बस हिम्मत न हारने की और आगे बढ़ते जाने की जरूरत है। अगर आप जिंदगी में मुश्किलों को पार करना सीख जाते हैं, तो पूरी दुनिया आपके लिए लड़ाई लड़ने को तैयार हो सकती है। आप सबमें अपार शक्ति मौजूद है, आपकी खुद की एक पहचान है, जरूरत है तो बस खुद को पहचानने की, फिर कोई भी मुकाम आपसे दूर नहीं।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)