कॉलेज में मैंने रोबोटिक्स में तीन राष्ट्रीय और चार राज्य-स्तरीय पुरस्कार जीते। इसके बाद मुझे लार्सन एंड टूब्रो में इंटर्नशिप करने का मौका मिल गया। मैं आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने के बारे में सोच रहा था, पर मुझे ऋण चुकाने, अपने घर का नवीनीकरण करने और अमेरिका जाने के लिए अपनी टिकट का भुगतान करने के साथ पॉकेट मनी के लिए रुपयों की आवश्यकता थी। पढ़ाई के साथ घर का खर्च चलाने के लिए मैंने विदेशी छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग देना शुरू किया।
इन छात्रों को पढ़ाना मेरे लिए अलग तरह का अनुभव था। चूंकि पहले मैं कोचिंग पढ़ा चुका था, तो वहां का अनुभव मेरे काम आया। बाद में कोचिंग के लिए मेरे पास कई बच्चों के आवेदन आए। कोचिंग से होने वाली कमाई से मैंने अपने सारे कर्ज चुका दिए। कॉलेज के बाद, मैंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) में प्रवेश लिया, जहां शोधार्थी के रूप में मुझे मासिक तीस हजार रुपये मिलते थे।
टीआईएफआर में पढ़ाई के दौरान मैंने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में दो शोध पत्र प्रकाशित किए। इन पत्रों ने वर्जीनिया विश्वविद्यालय का ध्यान आकर्षित किया, जहां से स्नातक अनुसंधान सहायक के रूप में काम करने का मेरे पास ऑफर आया। इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मुझे एहसास हुआ कि मेरी दिलचस्पी नैनो स्केल भौतिकी में है। मैंने अपनी इंजीनियरिंग के बाद के शोध के लिए जो विषय चुना, वह भी नैनो स्केल भौतिकी से संबंधित रहा है।
अब मैं शोध कर रहा हूं कि नैनो स्केल डिवाइस और अन्य सामान कैसे बनाए जाएं। पीएचडी के बाद, मैं नौकरी करना चाहता हूं। अपने देश में मैं एक कंपनी की स्थापना करना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि भारत प्रौद्योगिकी का आत्मनिर्भर विनिर्माण केंद्र बने। जरूरतमंदों और वंचित विद्यार्थियों की मदद करने के बारे में भी मैंने सोच रखा है।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)