महीने-दो महीने में हम टूथब्रश बदलते रहते हैं। आंकड़ा की नजर से देखें, तो देश में लगभग 150 मिलियन टूथब्रश हर महीने फेंक दिए जाते हैं। इसका नुकसान पर्यावरण को रहा है। रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाली और भी कई चीजें हैं, जिसे हम दोबारा इस्तेमाल में नहीं ला सकते।
इसलिए मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे पर्यावरण को नुकसान भी न हो और किसानो को ज्यादा-से-ज्यादा लाभ भी मिले। यह आइडिया तब आया, जब मैं अपने काम के सिलसिले में यूरोप के दौरे पर था। मैंने वहां देखा कि कैसे किसान और आम लोग पर्यावरण को फायदा पहुंचाने के लिए प्राकृतिक पदाथों से बने प्रोडक्ट़्स पर ही जोर दे रहे थे।
जर्मनी में एक किसान ने मुझे बताया कि जर्मनी न केवल अत्याधुनिक तकनीकी संसाधन उपयोग में लेता है, बल्कि उससे कई गुना ज्यादा उपज और प्रकृति को संरक्षित करने में भी अव्वल है। वहां के किसानों की जीवनशैली आैर आत्मनिर्भरता ने मुझे काफी प्रभावित किया।
तभी मैंने कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में कुछ करने की ठान ली। भारत लौटने के बाद पुणे के किसानों से मिला। उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की। इसी दौरान मेरी नजर बांस पर पड़ी। बांस को लेकर मैंने काफी खोजबीन की, तो पता चला कि विश्व में बांस उत्पादन में भारत दूसरे नंबर पर है।
तो क्यों न इसी में कुछ नया करें, यही सोचकर मैंने इसमें अपना नया उद्यम शुरू किया। नौकरी छोड़कर अपने फार्म हाउस में दस किसानों के साथ मिलकर बांस के प्रोडक्ट्स बनाने के लिए 'बैंबू इंडिया' के नाम से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना की। इंटरनेट की मदद से बांस के प्रोडक्टस बनाना सीखा और फिर किसानों को भी सिखाया।
टूथब्रश, कंघी, क्लॉथ क्लिप के अलावा और भी बहुत कुछ बना रहा हूं। 17 देशों में बैंबू से बने सामानों की सप्लाई हो रही है। भारत में भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं। बैंबू इंडिया के प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन (bambooindia.com) भी कोई ऑर्डर कर सकता है।