नितिन कालरा की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा
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सफलता और अमीर बनने की कहानियां बेशक हमें प्रेरणा देती हैं, लेकिन ये यह भी बताती हैं कि कामयाबी के रास्ते में धैर्य के साथ चलना पड़ता है और असफलताओं से सीखते तथा चुनौतियों से लड़ते हुए लगातार कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है लेट्स ट्राई के संस्थापक नितिन विनोद कालरा की। वह कई ऐसे युवा आंत्रप्रेन्योर के लिए मिसाल हैं, जो व्यापार जगत में अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। जब नितिन ने अपना स्टार्टअप शुरू किया था, तब उनके पास कुछ नहीं था, लेकिन आज उनकी खुद की कंपनी है, जिसका कारोबार करोड़ों में है। उन्होंने जीवन में किसी काम को छोटा नहीं समझा और हर वह काम किया, जिसे शायद आज के युवा करने से कतराएं। नितिन ने बगैर बाधाओं की परवाह किए अर्जुन की तरह सिर्फ अपने लक्ष्य पर निशाना साधे रखा और एक सफल आंत्रप्रेन्योर बनकर युवाओं के प्रेरणास्रोत बने।
शुरुआती जद्दोजहद
दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले नितिन का जन्म बेहद सामान्य परिवार में हुआ था। उनके पिता डीटीसी में मैकेनिक थे और मां सिलाई-बुनाई का काम करती थीं, ताकि परिवार के खर्चों में हाथ बटा सकें। घर में हमेशा पैसों की तंगी रहती थी। नितिन ने जैसे-तैसे अपनी स्कूली शिक्षा हासिल की। आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में दाखिला लिया। वह घर की स्थिति से अच्छी तरह परिचित थे। यही कारण है कि उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी की। क्लास खत्म होने के बाद वह मैकडॉनल्ड्स में टेबल साफ करने का काम करते थे। इसके लिए उन्हें बतौर मेहनताना बीस रुपये प्रति घंटे मिलते थे। वह ज्यादा पैसे कमा सकें, इसके लिए उन्होंने बाथरूम तक साफ करने से गुरेज नहीं किया।
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करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी
कॉलेज की डिग्री हासिल करने के बाद नितिन को बड़ी कंपनियों में काम करने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने खाद्य उद्योग से जुड़ी कई चीजें सीखीं और अनुभव प्राप्त किया। आईटीसी में काम करते हुए उन्होंने बाजार की जानकारी हासिल की। पेप्सिको में काम करते हुए उन्होंने बड़े खातों और खुदरा परिचालनों के प्रबंधन में विशेषज्ञता पाई और रेमंड्स में उन्हें अपने मार्केटिंग कौशल को और भी बेहतर बनाने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि बाजार में कंपनियां स्नैक्स के कई विकल्प ला रही हैं, लेकिन लोगों के पास हेल्दी (स्वास्थ्यवर्धक) स्नैक्स के विकल्प काफी कम हैं। इसलिए उन्होंने खुद का फूड स्टार्टअप शुरू करने की योजना बनाई। उस समय उनका पैकेज एक करोड़ रुपये सालाना था। वह चाहते तो एक अच्छी जिंदगी जी सकते थे, लेकिन यह उनका बदलाव लाने का जुनून ही था कि उन्होंने इस नौकरी को छोड़ दिया और खुद के स्नैक्स ब्रांड लेट्स ट्राई की शुरुआत की।
घर-घर जाकर बेचते थे गोलगप्पे
कोरोना काल में लॉकडाउन लगने के कारण कई कारोबारियों को व्यवसाय में घाटा हो रहा था और वे काफी मुश्किलों का सामना कर रहे थे। तभी नितिन ने अपना पहला उत्पाद ‘रेडी टू ईट गोलगप्पा’ लॉन्च किया। शुरुआती दिनों में तो वह खुद ही अपने घर पर स्नैक्स बनाते, पैक करते और गाड़ी में लादकर उसे घर-घर बेचने का काम करते। धीरे-धीरे लोगों को इस स्वाद पसंद आने लगा और नितिन का व्यापार बढ़ने लगा।
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जब मिला पहला निवेशक
नितिन को बड़ी सफलता तब मिली, जब वह लेट्स ट्राई को लेकर शार्क टैंक इंडिया में पहुंचे। यहां उनके बिजनेस मॉडल को काफी सराहा और पसंद किया गया। लेट्स ट्राई में सबसे बड़ा निवेश भी यहीं से आया। बोट्स के फाउंडर अमन गुप्ता और शादी डॉट कॉम के फाउंडर अनुपम मित्तल ने लेट्स ट्राई में निवेश किया। इस निवेश के बाद कंपनी ने रफ्तार पकड़ ली। नितिन की कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 500 करोड़ रुपये है। 2028 तक वह इसे 1,000 करोड़ रुपये की कंपनी बनाना चाहते हैं।
युवाओं को सीख
- सफलता केवल एक मंजिल नहीं, बल्कि पथरीली राह पर चलने की एक संघर्ष भरी यात्रा है।
- हर असफलता एक नई शुरुआत की ओर इशारा करती है।
- जीतने वाले कभी हार नहीं मानते और हार मानने वाले कभी जीतते नहीं।
- हार सपने टूटने से नहीं, प्रयास न करने से होती है।
- कामयाबी सिर्फ सोचने से नहीं मिलती, इसे पाने के लिए धैर्य और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।